By अभिनय आकाश | Oct 07, 2026
सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के हमले लगातार भीषण होते जा रहे हैं। वही सऊदी जिसने हाल ही में ओमान के आतंकी पायलट को बचाने की पूरी कोशिश की थी। हालांकि यूएई ने उसकी सारी कोशिशों को फेल करते हुए उसे सजा दिलाने की पूरी तैयारी कर ली है। यानी कि सऊदी जिस तरह के कट्टरपंथियों का बचाव कर रहा था और वैसे जिहादी उसे बड़े जख्म दे रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि कट्टरपंथी विद्रोही अल्लाह के मस्जिद को भी नहीं छोड़ रहे हैं। अल्लाह का घर कहे जाने वाले मदीना पर हाल ही में हूतियों ने बड़ा हमला किया था। जिसमें भारी नुकसान हुआ था। पूतियों से जान बचाने के लिए सऊदी इधर-उधर घूम रहा है। लेकिन इसी बीच सऊदी की मदद के लिए वो पाकिस्तान खड़ा हो गया है जो मक्का समझौता होने के बावजूद भी सऊदी को अब तक पिटवा रहा था। अब अचानक से पाकिस्तान को मक्का समझौता याद आया है और उसने अपनी सेना सऊदी में भेजने का फैसला लिया है। लेकिन जैसे ही युतियों को पता चला कि सऊदी में पाकिस्तान की सेना की एंट्री हो गई है तो हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर ऐसे भीषण हमले शुरू कर दिए जिसने पूरा देश दहला दिया है।
यहां देश की करीब 80% आबादी रहती है। यही वजह है कि हूतियों का क्षेत्रफल कम होने के बावजूद उनका देश की आबादी और अहम शहरों पर बड़ा प्रभाव है। हूतियों ने पिछले 48 घंटों में यमन के पश्चिमी तट पर कई रणनीतिक पहाड़ियों पर कब्जा किया है। अगर हूं इस इलाके को सरकारी इलाके से काट देते हैं तो सरकार पूरी तरह इस पर नियंत्रण खो देगी। यमन में सरकार और हूतियों के बीच करीब 12 साल से लड़ाई चल रही है। सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है। जबकि हूतियों को ईरान का समर्थन मिलता है। हूती विद्रोही सऊदी अरब पर हमला करने की सबसे बड़ी वजह उसी सैन्य गठबंधन को मानते हैं जिसने यमन में उनके खिलाफ बरसों तक हवाई हमले किए हैं। पश्चिमी देशों और सऊदी अरब का आरोप है कि ईरान भूतियों को हथियार, ट्रेनिंग और फंडिंग मुहैया कराता है। जिससे वे इतने बड़े स्तर पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने में सक्षम हो पाते हैं। तो कुल मिलाकर साफ है कि हुतियों ने सऊदी पर हमले बढ़ाते हुए पाकिस्तान को बता दिया है कि तुम अगर सामने आओगे तो तुम्हें भी नहीं छोड़ा जाएगा। इसलिए अब पाकिस्तान को फैसला करना है कि उसे अपनी वहां से सेना हटानी है या फिर अपनी कब्र खुदवानी है।