By अनन्या मिश्रा | Jan 24, 2026
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के जगत के फेमस गायक पंडित भीमसेन जोशी का 24 जनवरी को निधन हो गया था। पंडित भीमसेन जोशी को उनके चाहने वालों ने 'गाने के भगवान' और 'संगीत के देवता' जैसी कई उपाधियों से नवाजा था। उनकी गायकी ने किराना घराने की गायकी को एक नया मुकाम बख्शा था। पंडित जोशी ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को इतना चमकदार बनाया, जिस पर आज हम सभी गर्व करते हैं। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर पंडित भीमसेन जोशी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातो के बारे में...
कर्नाटक के गडग गांव में 04 फरवरी 1922 को पंडित भीमनेस गुरुराज जोशी का जन्म हुआ था। उन्होंने छोटी उम्र में ही अपनी मां को खो दिया था। जिसके बाद उनकी सौतेली मां ने भीमसेन जोशी की परवरिश की थी। पंडित भीमसेन जोशी अपने परिवार में उनके 16 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे।
बचपन में भीमसेन जोशी को जहां गाना-बजाना होता था, वह उसी जगह पर चले जाते थे। कभी-कभी वह उसी जगह पर गाना गाते हुए सो भी जाते थे। ऐसे समय पर भीमसेन जोशी का पता लगाने के लिए उनके माता-पिता को पुलिस की मदद लेनी पड़ती थी। गाने के प्रति जुनून के कारण ही भीमसेन जोशी महान गायक बन पाए थे।
पंडित भीमसेन जोशी के पहले संगीत के शिक्षक थे। उन्होंने महान गायक इनायत खान के साथ संगीत का प्रशिक्षण लिया था। बता दें कि अब्दुल करीम खान के ठुमरी 'पिया बिन नहीं आवत है चैन' ने पंडित जोशी को संगीतकार बनने के लिए प्रेरित किया था। भीमसेन जोशी ने साल 1933 में 11 साल की उम्र में संगीत के जुनून के कारण अपना घर छोड़ दिया था।
साल 1936 में सवाई गंधर्व पंडित भीमसेन जोशी के गुरु बने। वहीं 19 साल की उम्र में, उन्होंने साल 1941 में पंडित भीमसेन जोशी ने अपना पहला लाइव परफॉर्मेंस दिया था। साल 1942 में उनका पहला एल्बम रिलीज हुआ था। बताया जाता है कि एक बार उन्होंने जुकाम से छुटकारा पाने के लिए परफॉर्मेंस से करीब 16 हरी मिर्च खाई थी, जिससे कि उनका लाइव शो रद्द न हो और वह अपने जुकाम पर काबू पा लें।
भारत सरकार द्वारा पंडित भीमसेन जोशी को साल 1972 को 'पद्मश्री' साल 1985 को 'पद्म भूषण', साल 1999 'पद्म विभूषण' और साल 2008 में 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था।
वहीं बीमारी के कारण 24 जनवरी 2011 को पंडित भीमसेन जोशी का निधन हो गया था।