By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 30, 2019
नयी दिल्ली। नरेन्द्र मोदी सरकार को मिली एक बड़ी सफलता के तहत मंगलवार को संसद ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक देने की प्रथा को अपराध मानने के प्रावधान वाले एक ऐतिहासिक विधेयक मंजूरी दे दी। राज्यसभा में बीजद के समर्थन तथा सत्तारूढ़ राजग के घटक जद(यू) एवं अन्नाद्रमुक के वाक आउट के चलते सरकार उच्च सदन में इस विवादास्पद विधेयक को पारित कराने में सफल हो गयी। विधेयक में तीन तलाक का अपराध सिद्ध होने पर संबंधित पति को तीन साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है। मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को राज्यसभा ने 84 के मुकाबले 99 मतों से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। इस विधेयक को पारित कराते समय विपक्षी कांग्रेस, सपा एवं बसपा के कुछ सदस्यों तथा तेलंगाना राष्ट्र समिति एवं वाईएसआर कांग्रेस के कई सदस्यों के सदन में उपस्थित नहीं रहने के कारण सरकार को काफी राहत मिल गयी।इससे पहले उच्च सदन ने विधेयक को प्रवर समिति में भेजने के विपक्षी सदस्यों द्वारा लाये गये प्रस्ताव को 84 के मुकाबले 100 मतों से खारिज कर दिया। विधेयक पर लाये गये कांग्रेस के दिग्विजय सिंह के एक संशोधन को सदन ने 84 के मुकाबले 100 मतों से खारिज कर दिया।कानून बनने के बाद यह विधेयक इस संबंध में 21 फरवरी को लाये गये अध्यादेश का स्थान लेगा। अब इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
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उन्होंने कहा कि तीन तलाक से प्रभावित होने वाली करीब 75 प्रतिशत महिलाएं गरीब वर्ग की होती हैं। ऐसे में यह विधेयक उनको ध्यान में रखकर बनाया गया है।प्रसाद ने कहा कि हम ‘‘सबका साथ सबका विकास एवं सबका विश्वास’’ में भरोसा करते हैं और इसमें हम वोटों के नफा नुकसान पर ध्यान नहीं देंगे और सबके विकास के लिए आगे बढ़ेंगे और उन्हें (मुस्लिम समाज को) पीछे नहीं छोड़ेंगे।मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई मुस्लिम पति अपनी पत्नी को मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रानिक रूप से या किसी अन्य विधि से तीन तलाक देता है तो उसकी ऐसी कोई भी ‘उदघोषणा शून्य और अवैध होगी।’इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि तीन तलाक से पीड़ित महिला अपने पति से स्वयं और अपनी आश्रित संतानों के लिए निर्वाह भत्ता प्राप्त पाने की हकदार होगी। इस रकम को मजिस्ट्रेट निर्धारित करेगा। राज्यसभा में यह दूसरा मौका है जब सरकार ने उच्च सदन में संख्या बल अपने पक्ष में नहीं होने के बावजूद महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करवाया। इससे पहले कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद आरटीआई संशोधन विधेयक को उच्च सदन में पारित करवाने में सरकार सफल रही थी।तीन तलाक संबंधित विधेयक पारित करने के पक्ष में बीजद के सात सदस्यों ने समर्थन दिया। जदयू के छह एवं अन्नाद्रमुक के 11 सदस्यों के वाक आउट कर जाने के कारण सदन में बहुमत का आंकड़ा नीचे चला गया जो सामान्य तौर पर 121 रहता है। 242 सदस्यीय उच्च सदन में सत्तारूढ़ राजग के 107 हैं।