By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 24, 2023
संसद की एक समिति ने भारतीय न्याय प्रणाली पर दूरगामी प्रभाव डालने वाले तीन विधेयकों...‘न्याय संहिता 2023’, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023’ और ‘भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023’ पर विचार करने के लिए बृहस्पतिवार को विचार विमर्श शुरू किया और प्रस्तावित कानून के विभिन्न आयामों को लेकर गृह सचिव अजय भल्ला नेविस्तृत प्रस्तुति दी। सूत्रों ने बताया कि द्रमुक सांसद दयानिधि मारन ने बैठक के दौरान विधेयकों के हिन्दी नामों पर अपनी असहमति जतायी और सुझाव दिया कि समिति को विभिन्न राज्यों के बार काउंसिल के सदस्यों के साथ विचार विमर्श करना चाहिए। समझा जाता है कि उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि आपराधिक सुनवाई जिला स्तरीय अदालतों में होती है। सूत्रों ने बताया कि द्रमुक सांसद ने कहा कि समिति को राज्यों का दौरा करना चाहिए ताकि विभिन्न पक्षकारों के विचार सुन सके।
भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजलाल गृह संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने 11 अगस्त को लोकसभा में इन तीनों विधेयकों को पेश किया था। सदन ने गृह मंत्री के प्रस्ताव पर तीनों विधेयकों को संसदीय स्थायी समिति को भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी ताकि इन पर व्यापक विचार-विमर्श हो सके। बाद में लोकसभा के संसदीय मामलों संबंधी बुलेटिन में कहा गया था कि ‘भारतीय न्याय संहिता 2023’, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023’ और ‘भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023’ को आगे विचार विमर्श एवं अध्ययन के लिए गृह मामलों संबंधी स्थायी समिति को भेज दिया गया है। बुलेटिन में कहा गया है कि समिति को तीन महीने में रिपोर्ट देनी है। ऐसे में समिति के पास विधेयकों की पड़ताल करने और शीतकालीन सत्र में संसद को रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन महीने का समय है।