By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 07, 2026
चंडीगढ़, छह नवंबर नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने मानसा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) वैभव चौधरी के तबादले तक अनशन करने का फैसला किया है। झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा शहर के एक व्यस्त बाजार में एक दवा की दुकान पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दवा दुकान मालिक ने झोटा पर गोली चलाई थी, क्योंकि कार्यकर्ता ने उसे एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीली दवाएं बेचने को लेकर टोका था।
बाद में दवा दुकान मालिक को गिरफ़्तार कर लिया गया था। भीम सिंह ने मीडिया से बातचीत में एसएसपी पर कई गंभीर आरोप लगाए। इस बीच, झोटा के परिवार द्वारा सरकार के साथ बुधवार को सहमति जताए जाने के बाद 22 दिन के प्रदर्शन के उपरांत झोटा का शव शुक्रवार को पोस्टमार्टम के लिए मानसा से चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) लाया गया।
मानसा के सिविल अस्पताल के मुर्दाघर में तीन सप्ताह से अधिक समय से रखा शव बृहस्पतिवार देर रात एक एम्बुलेंस में ले जाया गया। सूत्रों ने, हालांकि बताया कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया तुरंत शुरू नहीं की जा सकी, क्योंकि कई प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी था। ऐसा इसलिए क्योंकि शव पहले मानसा के मुर्दाघर में कई दिनों तक कुछ खास तापमान की स्थितियों में रखा गया था।
भीम सिंह ने शुक्रवार को पीजीआईएमआर में संवाददाताओं से कहा कि पोस्टमार्टम के बाद परिवार शव लेकर मानसा वापस लौट जाएगा। उन्होंने मानसा के एसएसपी के तबादले की मांग करते हुए कहा, ‘‘हमने यह मांग पहले भी उठाई थी। सरकार एसएसपी का तबादला क्यों नहीं कर रही है?
झोटा का शव मानसा पहुंचने से पहले एसएसपी का तबादला हो जाना चाहिए। तब तक मैं अन्न ग्रहण नहीं करूंगा...।’’ भीम सिंह ने कहा, ‘‘मैं पंजाब के लोगों से कहता हूं कि अगर आज या कल मेरी मौत हो जाती है, तो भी वे नशों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखें।’’ झोटा के लिए न्याय की मांग कर रही एक संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने बुधवार को सरकार के साथ बैठक में गिरफ्तार किए गए अपने दो सदस्यों की रिहाई सहित अन्य मांगें रखी थीं। लखवीर सिंह उर्फ लखा सिधाना सहित गिरफ्तार सदस्यों को बृहस्पतिवार शाम नाभा जिला जेल से रिहा कर दिया गया।
झोटा के परिवार ने जेएसी के साथ मिलकर, मारे गए कार्यकर्ता के लिए न्याय की मांग करते हुए मानसा में धरना दिया। तीन सप्ताह से जारी गतिरोध बुधवार को परिवार, समिति और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच पांच घंटे चली बैठक के बाद समाप्त हुआ। बैठक में विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां भी शामिल हुए।