By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 06, 2026
चंडीगढ़, छह नवंबर नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिवार द्वारा सरकार के साथ सहमति जताए जाने के बाद 22 दिन से जारी आंदोलन समाप्त हो गया जिसके बाद झोटा का शव शुक्रवार को पोस्टमार्टम के लिए मानसा से चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) लाया गया। झोटा का शव तीन सप्ताह से अधिक समय तक मानसा के सरकारी अस्पताल के मुर्दाघर में रखा गया था। बृहस्पतिवार देर रात इसे एंबुलेंस से चंडीगढ़ ले जाया गया।
झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक भीड़भाड़ वाले बाजार में स्थित दवा की दुकान के भीतर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पीजीआईएमईआर में उनके पिता भीम सिंह ने शुक्रवार को कहा कि पोस्टमार्टम के बाद परिवार शव लेकर मानसा लौट जाएगा। उन्होंने कहा कि मानसा पहुंचने के समय के आधार पर अंतिम संस्कार शुक्रवार या शनिवार को किया जाएगा।
झोटा के लिए न्याय की मांग कर रही एक संयुक्त कार्रवाई समिति ने गिरफ्तार किए गए अपने दो सदस्यों की रिहाई सहित अन्य मांगें रखी थीं। लखवीर सिंह उर्फ लखा सिधाना सहित गिरफ्तार सदस्यों को बृहस्पतिवार शाम नाभा जिला जेल से रिहा कर दिया गया। तीन सप्ताह से जारी गतिरोध बुधवार को परिवार, समिति और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच पांच घंटे चली बैठक के बाद समाप्त हुआ।
बैठक में विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां भी शामिल हुए। सरकार ने परिवार को दो करोड़ रुपये का मुआवजा देने और झोटा की पत्नी को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने पर भी सहमति बनी।