Medical Science में बड़ा बदलाव, PCOS अब हुआ PMOS! जानिए नाम बदलने की असली वजह

By दिव्यांशी भदौरिया | May 15, 2026

ज्यादातर महिलाओं में हार्मोनल समस्या PCOS यानी के पॉलिसिस्टक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) का नाम बदल दिया गया है। अब इसे पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) कहा जाएगा। आपको बता दें कि, दुनियाभर के हेल्थ एक्सपर्ट्स और रिसर्चर्स की सहमति के बाद से यह बदलाव हुआ है।

PCOS का नाम क्यों बदला गया?

'द लैंसेट' में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में प्रजनन आयु की लगभग 17 करोड़ महिलाएं PCOS से प्रभावित हैं। काफी लंबे समय से चल रही रिसर्च और एक्सपर्ट की चर्चा के बाद यह महसूस किया गया कि 'PCOS' नाम की यह बीमारी वास्तविक स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शाता है।

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि पुराने नाम की वजह के कई महिलाओं में इस समस्या की पहचान देर से हो पाती थी। इसके साथ ही इससे जुड़ी हार्मोनल, मेटाबोलिक और मेंटल हेल्थ संबंधी परेशानियों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

असल में  'पॉलीसिस्टिक' शब्द सबसे ज्यादा भ्रम पैदा करता था। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस कंडीशन में ओवरी पर नॉर्मल सिस्ट नहीं बनते, बल्कि 'अरेस्टेड फॉलिकल्स' विकसित होते हैं। यानी हार्मोनल असंतुलन के कारण एग्स पूरी तरह से मैच्योर नहीं हो पाते है और ओव्यूलेशन प्रभावित होता है।

मेडिकल एक्सपर्ट मानते है कि कई महिलाएं सिर्फ इसलिए समय पर चेकअप नहीं करवाती थीं, क्योंकि उनके स्कैन में ओवरी सिस्ट नजर नहीं आते थे। वहीं, PCOS/PMOS में सिस्ट होना जरुरी नहीं है। इस वजह से पुराना नाम कई बार बीमारी की पहचान में देरी का कारण बन जाता था। नया नाम इस कंडीशन के हार्मोनल और मेटाबोलिक पहलुओं पर अधिक फोकस नहीं करते हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट ने माना है कि बीमारी का नाम उसकी पूरी जटिलता को दर्शाता है। इसके लिए सात महाद्वीपों के डॉक्टरों, रिसर्चर्स और मरीजों ने करीब 14 वर्षों तक मिलकर काम किया है। गौरतलब है कि लंबी चर्चा और इंटरनेशनल सहमति के बाद आखिरकार PCOS का नया नाम PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) रखने का फैसला किया।

PMOS का नाम का मतलब क्या है?

- पॉलीएंडोक्राइन - इसका अर्थ है कि यह समस्या शरीर के कई हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करती है।

- मेटाबोलिक- यह बीमारी इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना और डायबिटीज के खतरे से जुड़ी होती है।

 - ओवेरियन- यह ओव्यूलेशन, पीरियड्स और फर्टिलिटी को प्रभावित करती है।

 - सिंड्रोम- यह कई लक्षणों और हेल्थ रिस्क का ग्रुप है।

PMOS के लक्षण

- पीरियड्स का न आना या फिर अनियमित पीरियड्स।

 - चेहरे पर अधिक बाल आना।

 - मुंहासे और ऑयली स्किन।

 - अचानक से तेजी से वजन बढ़ना।

 - वजन कम करने में दिक्कत होना।

 - इंसुलिन रेजिस्टेंस।

 - फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं।

 - मूड स्विंग और तनाव

एक्सपर्ट के मुताबिक, नाम बदलने से इलाज में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा। लेकिन इससे बीमारी को समझने और सही पर पहचानने में मदद मिल सकती है।

PMOS को कैसे मैनेज करें

- नियमित रुप से एक्सरसाइज

 - हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट

 - वजन कंट्रोल रखना 

 - पर्याप्त मात्रा में नींद लें

 - तनाव बिल्कुल न लें

 - जरुरत पड़ने पर हार्मोनल थेरेपी

 - इंसुलिन सेंसिटिव दवाएं

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