सत्ता पाने के लिए धर्म, जाति के इस्तेमाल से शांति बाधित हो सकती है: मनमोहन सिंह

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 25, 2018

नयी दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सत्ता हासिल करने के लिए सियासी पार्टियों की ओर से धर्म और जाति के इस्तेमाल के खिलाफ आगह करते हुए शनिवार को कहा कि इससे नफरत और विभाजन का वातावरण पैदा हो सकता है। उन्होंने इस तरह के गलत इरादे वाले लोगों का मुकाबला करने के लिए अच्छे लोगों को एक साथ आने की जरूरत बताई। सिंह ने कहा कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशें डर, चिंता और अनिश्चिता का माहौल बना सकती है। उन्होंने कहा कि शांति एवं सौहार्द के लिए सभी संस्थानों, न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका का धर्मनिरपेक्ष चरित्र पहली जरूरत है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए शासन के संस्थान एक आवश्यक शर्त हैं। इसके अलावा, उनका निष्पक्ष होना जरूरी है तथा उन्हें समाज के सभी तबकों के लिए काम करना चाहिए। सिंह ने कहा, ‘‘ दुर्भाग्य से, राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने एवं सत्ता हासिल करने के लिए धर्म, जाति और अन्य कारकों का इस्तेमाल करने से, धार्मिक एवं जातीय समूहों में नफरत का माहौल बन सकता है और उनके बीच विभाजन पैदा कर सकता है। इस तरह की स्थिति शांतिपूर्ण बदलाव के समक्ष गंभीर चुनौती पेश कर सकती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ इस संदर्भ में, शांति, सौहार्द और खुशहाली को बाधित करने वाली ताकतों के गलत इरादों का मुकाबला करने के लिए समाज के ज़हीन तबके को साथ आने की जरूरत है।’’

गुरुनानक, रविंद्रनाथ टेगौर, महात्मा गांधी, सर मोहम्मद इकबाल का हवाला देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वे सभी एक ऐसा देश चाहते थे जो सांप्रदायिक अशांति से मुक्त हो और लोगों में उनकी जाति, नस्ल, रंग, धर्म के आधार पर कोई विभाजन नहीं हो। उन्होंने कहा, ‘‘ यह हमेशा याद रखा जाना चाहिए कि भारत एक बहु-सांस्कृतिक, बहु जातीय, बहु भाषी देश है। बहरहाल, कुछ ताकतें हैं जो इस विविधता का फायदा उठा रही हैं और देश की एकता के समक्ष चुनौती पैदा कर रही हैं।’’ सिंह ने कहा, ‘‘ एक ऐसे समाज में जहां विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं, वहां डर, चिंता और अनिश्चितता से मुक्त जीवन जीने के लिए सांप्रदायिक सौहार्द बहुत अहम है।’’ 

पूर्व प्रधानमंत्री की टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब विश्व हिन्दू परिषद ने अयोध्या में राम मंदिर के संवेदनशील मुद्दे पर ‘धर्म संसद’ बुलाई है। शांति और सौहार्द के लिए सभी संस्थानों का धर्मनिरपेक्ष चरित्र बनाए रखने को जरूरी बताते हुए सिंह ने कहा कि यह राजनीतिक, धार्मिक नेतृत्व, नागरिक समाज, बुद्धिजीवी, और मीडिया की जिम्मेदारी है कि वे संविधान और संस्थानों की विश्वनीयता को बनाए रखें। उन्होंने कहा, ‘‘ जब संस्थान अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों के निर्वहन से विचलन शुरू करते हैं और जानबूझकर या अनजाने में संवैधानिकत्तेर शक्तियों और राज्येत्तर तत्वों का शिकार हो होते हैं, तो परिवर्तन की प्रक्रिया में हिंसा का खतरा होता है।’’ उन्होंने कहा कि समाज में शांति, सौहार्द और खुशहाली के लिए आर्थिक प्रगति और विकास जरूरी शर्त है लेकिन पर्याप्त कारण नहीं है।

प्रमुख खबरें

Top 10 Breaking News 20 May 2026 | PM Modi Meeting with Giorgia Meloni | PM Modi Melodi Toffee | Operation Epic Fury | आज की मुख्य सुर्खियाँ यहां विस्तार से पढ़ें

पीएम मोदी और अमित शाह को लेकर राहुल गांधी के बयान पर बोले नितिन नवीन, ये उनकी अराजकतावादी मानसिकता को दिखाता है

Kolkata में Abhishek Banerjee की 43 संपत्तियां? BJP ने जारी की List, TMC बोली- सब Fake है

कैबिनेट में AIADMK का कोई बागी नहीं, सीपीएम और वीसीके की चेतावनी के बीच TVK ने सहयोगियों को दिया आश्वासन