By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Oct 28, 2021
सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार की खूब खबर ले ली है। पिछले दो साल से चल रहे जासूसी के पेगासस नामक मामले में अदालत ने सरकार के सारे तर्कों, बहानों और टालमटोलों को रद्द कर दिया है। उसने कई व्यक्तियों, संगठनों और प्रमुख पत्रकारों की याचिका स्वीकार करते हुए जासूसी के इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। यह जांच अब सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवा-निवृत्त न्यायाधीश आर.वी. रविंद्रन की अध्यक्षता में होगी और उसकी रपट वे अगले दो माह में अदालत के सामने पेश करेंगे।
अदालत ने सरकारी रवैए की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर उसे कुछ भी उटपटांग काम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उसने सरकार के इस सुझाव को भी रद्द कर दिया है कि इस मामले की जांच विशेषज्ञों के एक दल से करवाई जाए। विशेषज्ञों को तो कोई भी सरकार प्रभावित कर सकती है। इसीलिए अब एक न्यायाधीश ही इस मामले की जांच करेंगे। यह मामला सिर्फ नेताओं और पत्रकारों की जासूसी का ही नहीं है, यह प्रत्येक नागरिक के मानवीय अधिकारों की सुरक्षा का है। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला न्यायपालिका की इज्जत में तो चार चांद लगा ही रहा है, साथ ही सरकार की मुश्किलें भी बढ़ा रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय अपनी रपट पेश करते हुए पूरी सावधानी बरतेगा ताकि अपराधियों को सतर्क हो जाने का मौका न मिल जाए। इस मामले ने जब तूल पकड़ा, तब मैंने सुझाव दिया था कि सरकार थोड़ी हिम्मत करती तो यह मामला आसानी से सुलझ सकता था। सरकार उन निर्दोष नेताओं, पत्रकारों और अन्य व्यक्तियों से माफी मांग लेती, जो निर्दोष थे और अब ऐसा इंतजाम कर सकती थी कि कोई भी सरकार वैसी गलती न कर सके।
- डॉ. वेदप्रताप वैदिक