पेलोसी की ताइवान यात्रा से अमेरिका की छवि चमकी और चीन की धूमिल हुई

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Aug 05, 2022

अमेरिकी कांग्रेस (निम्न सदन) की अध्यक्षा नैन्सी पेलोसी की ताइवान-यात्रा पर सारी दुनिया का ध्यान केंद्रित हो गया था। न तो ताइवान कोई महाशक्ति है और न ही पेलोसी अमेरिका की राष्ट्रपति है। फिर भी उनकी यात्रा को लेकर इतना शोर-शराबा क्यों मच गया? इसीलिए कि दुनिया को यह डर लग रहा था कि ताइवान कहीं दूसरा यूक्रेन न बन जाए। वहां तो झगड़ा रूस और यूक्रेन के बीच हुआ है लेकिन यहाँ तो एक तरफ चीन है और दूसरी तरफ अमेरिका! 

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चीन मानता है कि यह चीन को अमेरिका की खुली चुनौती है। चीनियों ने दो-टूक शब्दों में धमकी दी थी कि यदि नैन्सी की ताइवान यात्रा हुई तो चीन उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई किए बिना नहीं रहेगा। चीन ने ताइवान के चारों तरफ कई लड़ाकू जहाज और जलपोत डटा दिए थे और अमेरिका ने भी अपने हमलावर जहाज, प्रक्षेपास्त्र और जलपोत आदि भी तैनात कर दिए थे। डर यह लग रहा था कि यदि गलती से एक भी हथियार का इस्तेमाल किसी तरफ से हो गया तो भयंकर विनाश-लीला छिड़ सकती है। चीन इस यात्रा के कारण इतना क्रोधित हो गया था कि उसने ताइवान जाने वाली हर चीज़ पर प्रतिबंध लगा दिया था। ताइवान भी इतना डर गया था कि उसने अपने सवा दो करोड़ लोगों को बमबारी से बचाने के लिए सुरक्षा का इंतजाम कर लिया था। पेलोसी 24 घंटे ताइवान में बिताकर अब दक्षिण कोरिया रवाना हो गई हैं। वे ताइवानी नेताओं से खुलकर मिली हैं और अमेरिका चीन के खिलाफ बराबर खम ठोक रहा है।

जो बाइडन की सरकार के लिए पेलोसी की ताइवान-यात्रा और अल-क़ायदा के सरगना अल-जवाहिरी का उन्मूलन विशेष उपलब्धि बन गई है। चीन ने जवाहिरी की हत्या पर भी अमेरिका की आलोचना की है। चीन और अमेरिका के बीच बढ़ते हुए तनाव के कारण चीन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बने चार देशों के चौगुटे की भी खुलकर निंदा की थी। पेलोसी की इस ताइवान-यात्रा ने सिद्ध कर दिया है कि चीन कोरी गीदड़भभकियाँ देने का उस्ताद है। इस मामले के कारण चीन का बड़बोलापन बदनाम हुए बिना नहीं रहेगा। पेलोसी की इस यात्रा ने अमेरिका की छवि चमका दी है और चीन की छवि को धूमिल कर दिया है।

- डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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