पंजाब के किसान UP-बिहार के लोगों को बनाते हैं ड्रग्स का आदी, बिना मजदूरी कराते हैं काम, केंद्र ने मांगी रिपोर्ट

By अभिनय आकाश | Apr 03, 2021

केंद्रीय गृह मंत्रालय से भेजे गए पत्र के अनुसार बीएसएफ को ये ज्ञात हुआ है कि पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में किसान मजदूरों से बंधुआ मजदूरी करवा रहे हैं। इनसे ज्यादा काम करवाया जा रहा है और इसके एवज में मिलने वाले मेहनताना से भी उन्हें वंचित रखा जा रहा है। इस बाबत केंद्र सरकार ने पंजाब की कांग्रेस शासित कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार को पत्र लिखकर सूचित किया है कि बिहार और उत्तर प्रदेश के मानसिक रूप से कमजोर 58 लोग पंजाब के बॉर्डर से लगते- फिरोजपुर, गुरदासपुर, अमृतसर और अबोहर में बंधुआ मजदूकों के रूप में काम करते पाये गये हैं और इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार को उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

बीएसएफ ने 2019 और 2020 के दौरान 58 बंधक मजदूरों को छुड़ाकर पंजाब पुलिस के हवाले किया है। पत्र  के अनुसार पूछताछ के दौरान पाया गया है कि अधिकतर श्रमिक मानसिक रूप से कमजोर थे और पंजाब के सीमावर्ती गांवों में किसानों के साथ बंधुआ मजदूरों की तरह काम कर रहे थे।

नशे का आदी बनाकर करवाते हैं काम 

पंजाब के किसान उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले मजदूरों को पहले नशे का आदी बनाते हैं। फिर उन्हें बंधक बनाकर अपने खेतों में अमानवीय तरीके से काम करवाते हैं।  

बिहार और यूपी के लोग बन रहे शिकार 

ये मजदूर अधिकतर यूपी और बिहार के पिछड़े इलाकों से लाए जाते हैं। छुड़ाये गये लोग गरीब पारिवारिक पृष्ठभूमि के थे और बिहार तथा उत्तर प्रदेश के सुदूर इलाकों के रहने वाले थे। गृह मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में सूचना मिली है कि मानव-तस्करी करने वाले गिरोह पंजाब में काम करने के लिए ऐसे मजदूरों को अच्छी पगार का वादा करके उनके पैतृक स्थानों से काम करने के लिए बुलाते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनका शोषण किया जाता है, बहुत कम वेतन दिया जाता है और उनके साथ अमानवीय बर्ताव किया जाता है। 

अकाली दल ने किसानों को बदनाम करने की कोशिश बताया

केंद्र सरकार द्वारा पंजाब में नशा देकर बंधुआ मजदूरी कराए जाने के मामले में कभी एनडीए की पाटर्नर रही शिरोमणि अकाली दल ने सवाल उठाए हैं। अकाली दल की तरफ से केंद्र के लिखे पत्र को पंजाब के किसानों को बदनाम करने की कोशिश बताया गया है। अकाली दल के नेता और पूर्व सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा की तरफ से कहा गचा है कि गृह मंत्रालय का पत्र अपने आप में विरोधाङासी है। उन्होंने दावा किया कि बीएसएफ द्वारा छुड़ाए गए 58 लोग मानसिक रूप से निशक्त लग रहे हैं। पूर्व सांसद ने कहा कि रिपोर्ट को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए और कुछ मानसिक रूप से निशक्त लोगों के सीमावर्ती क्षेत्रों में पाए जाने के असली कारण का पता लगाया जाना चाहिए।  

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