26–27 मार्च को होगा कन्या पूजन, पूजा से मिलती है सुख-समृद्धि और रोग-मुक्ति

By डा. अनीष व्यास | Mar 24, 2026

चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस साल इस बार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो रहे हैं, जिसका समापन 27 मार्च होगा। चैत्र नवरात्रि की धूम पूरे देश में है। माता की भक्ति में लीन भक्तों को अब अष्टमी और नवमी का इंतजार है। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और रामनवमी 26 मार्च को मनाई जाएगी। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू हो गई है। वहीं इसका समापन 27 मार्च  को होगा। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और रामनवमी 26 मार्च को मनाई जाएगी और चैत्र नवरात्रि की नवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी। अष्टमी और नवमी पर कन्याओं को भोजन कराया जाता है। नवरात्र के दौरान अलग-अलग दिनों में देवी दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। व्रत रखने वाले भक्त कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही अपना व्रत खोलते हैं। कन्याओं को देवी मां का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन कन्याओं को भोजन कराने से घर में सुख, शांति एवं सम्पन्नता आती है। कन्या भोज के दौरान नौ कन्याओं का होना आवश्यक होता है। इस बीच यदि कन्याएं 10 वर्ष से कम आयु की हो तो जातक को कभी धन की कमी नही होती और उसका जीवन उन्नतशील रहता है।

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कन्या पूजन महाष्टमी और रामनवमी 

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि नवरात्रि में कन्या पूजन या कुमारी पूजा, महाष्टमी और रामनवमी दोनों ही तिथियों को किया जाएगा। महाष्टमी को मां महागौरी और रामनवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। जिन घरों में महाष्टमी और महानवमी की पूजा होती है, वहां इस दिन कन्याओं को भोजन करवाया जाता है और उन्हें गिप्ट बांटे जाते हैं।

पुराणों में है कन्या भोज का महत्व

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पौराणिक धर्म ग्रंथों एवं पुराणों के अनुसार नवरात्री के अंतिम दिन कौमारी पूजन आवश्यक होता है। क्योंकि कन्या पूजन के बिना भक्त के नवरात्र व्रत अधूरे माने जाते हैं। कन्या पूजन के लिए अष्टमी और नवमी तिथि को उपयुक्त माना जाता है। कन्या भोज के लिए दस वर्ष तक की कन्याएं उपयुक्त होती हैं।

कन्या और देवी के शस्त्रों की पूजा

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि अष्टमी को विविध प्रकार से मां शक्ति की पूजा करें। इस दिन देवी के शस्त्रों की पूजा करनी चाहिए। इस तिथि पर विविध प्रकार से पूजा करनी चाहिए और विशेष आहुतियों के साथ देवी की प्रसन्नता के लिए हवन करवाना चाहिए। इसके साथ ही 9 कन्याओं को देवी का स्वरूप मानते हुए भोजन करवाना चाहिए। दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा को विशेष प्रसाद चढ़ाना चाहिए। पूजा के बाद रात्रि को जागरण करते हुए भजन, कीर्तन, नृत्यादि उत्सव मनाना चाहिए।

हर आयु की कन्या का होता है अलग महत्व

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 2 साल की कन्या को कौमारी कहा जाता है। इनकी पूजा से दुख और दरिद्रता खत्म होती है। 3 साल की कन्या त्रिमूर्ति मानी जाती है। त्रिमूर्ति के पूजन से धन-धान्य का आगमन और परिवार का कल्याण होता है। 4 साल की कन्या कल्याणी मानी जाती है। इनकी पूजा से सुख-समृद्धि मिलती है। 5 साल की कन्या रोहिणी माना गया है। इनकी पूजन से रोग-मुक्ति मिलती है। 6 साल की कन्या कालिका होती है। इनकी पूजा से विद्या और राजयोग की प्राप्ति होती है। 7 साल की कन्या को चंडिका माना जाता है। इनकी पूजा से ऐश्वर्य मिलता है। 8 साल की कन्या शांभवी होती है। इनकी पूजा से लोकप्रियता प्राप्त होती है। 9 साल की कन्या दुर्गा को दुर्गा कहा गया है। इनकी पूजा से शत्रु विजय और असाध्य कार्य सिद्ध होते हैं। 10 साल की कन्या सुभद्रा होती है। सुभद्रा के पूजन से मनोरथ पूर्ण होते हैं और सुख मिलता है।

अष्टमी तिथि 26 मार्च

भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि 25 मार्च 2026 को दोपहर 1:50 बजे से शुरू होकर 26 मार्च 2026 को सुबह 11:48 बजे तक रहेगी। ऐसे में नवरात्र की अष्टमी तिथि का व्रत 26 मार्च को रखा जाएगा। 

नवमी तिथि 27 मार्च

कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च 2026 को सुबह 11:46 मिनट पर होगा। वहीं इस तिथि का अंत 27 मार्च 2026 को सुबह 10:07 मिनट पर होगा। ऐसे में नवरात्र की नवमी तिथि का व्रत 27 मार्च को रखा जाएगा। 

इस तरह करें पूजन

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि कन्या पूजन के दिन घर आईं कन्याओं का सच्चे मन से स्वागत करना चाहिए। इससे देवी मां प्रसन्न होती हैं। इसके बाद स्वच्छ जल से उनके पैरों को धोना चाहिए। इससे भक्त के पापों का नाश होता है। इसके बाद सभी नौ कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए। इससे भक्त की तरक्की होती है। पैर धोने के बाद कन्याओं को साफ आसन पर बैठाना चाहिए। अब सारी कन्याओं के माथे पर कुमकुम का टीका लगाना चाहिए और कलावा बांधना चाहिए। कन्याओं को भोजन कराने से पहले अन्य का पहला हिस्सा देवी मां को भेंट करें, िफर सारी कन्याओं को भोजन परोसे। वैसे तो मां दुर्गा को हलवा, चना और पूरी का भोग लगाया जाता है। लेकिन अगर आपका सामाथ्र्य नहीं है तो आप अपनी इच्छानुसार कन्याओं को भोजन कराएं। भोजन समाप्त होने पर कन्याओं को अपने सामथ्र्य अनुसार दक्षिणा अवश्य दें। क्योंकि दक्षिणा के बिना दान अधूरा रहता है। 

विवाह में देरी

यदि शादी में देरी हो रही है तो पांच साल की कन्या को खाना खिलाकर। श्रृंगार का सामान भेंट करें।

धन संबंधी समस्या

पैसों की कमी से परेशान हैं तो चार साल की कन्या को खीर खिलाएं। इसके बाद पीले कपड़े और दक्षिणा दें।

शत्रु बाधा और काम में रुकावटें

नौ साल की तीन कन्याओं को भोजन सामग्री और कपड़ें दें।

पारिवारिक क्लेश

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि तीन और दस साल की कन्याओं को मिठाई दें।

बेरोजगारी

छह साल की कन्या को छाता और कपड़ें भेंट करें।

सभी समस्याओं का निवारण

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पांच से 10 साल की कन्याओं को भोजन सामग्री देकर दूध, पानी या फलों का रस भेंट करें। सौन्दर्य सामग्री भी दें।

- डा. अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक

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