By Ankit Jaiswal | Oct 15, 2026
पाकिस्तान के पेशावर शहर से गुरुवार को एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। यहां एक स्कूल की छत गिरने से कई बच्चों और एक शिक्षिका की जान चली गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंच गए। मलबे में दबे बच्चों और स्कूल के कर्मचारियों को निकालने के लिए राहत कार्य शुरू किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना में कम से कम 33 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
मुहम्मद आसिम के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले सभी बच्चे 13 साल या उससे कम उम्र के थे। यह बात इस घटना को और भी दुखद बनाती है। अधिकारियों ने बताया कि 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बचाव दल के मुताबिक, 25 घायल बच्चों को इलाज के लिए अलग-अलग चिकित्सा केंद्रों में पहुंचाया गया। अस्पतालों में घायलों को जरूरी इलाज देने की व्यवस्था की गई है।
हादसे के बाद राहत और बचाव दल मलबा हटाने में जुट गए। बचावकर्मियों को आशंका थी कि कुछ बच्चे और स्कूल कर्मचारी अभी भी ढही हुई इमारत के नीचे फंसे हो सकते हैं। इसी वजह से मलबे को सावधानी से हटाकर लोगों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों ने मृतकों की संख्या और घायलों की स्थिति को लेकर जानकारी साझा की है, जबकि बचाव अभियान के दौरान फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना प्राथमिकता बना हुआ है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस हादसे में हुई मौतों पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इतनी कम उम्र के बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान में इमारतों और छतों के गिरने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। इसके पीछे कमजोर सुरक्षा व्यवस्था, निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल और भवनों की गुणवत्ता की ठीक से जांच नहीं होना प्रमुख कारण माने जाते हैं। स्कूल जैसी जगहों पर इस तरह के हादसे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
इससे पहले जुलाई में उमरकोट के पास एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की बाहरी दीवार गिरने से 3 से 13 साल की उम्र की 3 बच्चियों की मौत हो गई थी। उसी महीने लाहौर के बागबानपुरा इलाके में निर्माणाधीन निजी स्कूल की छत गिरने से एक बच्चे की जान चली गई थी और कम से कम 5 लोग घायल हुए थे। जून में लाहौर के कहना इलाके में एक निजी ट्यूशन सेंटर की छत गिरने से 14 बच्चों की मौत हुई थी। इससे पहले डेरा गाजी खान के एक निजी स्कूल में कक्षा की छत गिरने से 4 बच्चों की जान गई थी और 20 लोग घायल हुए थे।
पेशावर की ताजा घटना ने एक बार फिर स्कूल भवनों की सुरक्षा और निर्माण मानकों की जांच की जरूरत को सामने ला दिया है। बच्चों की जान बचाने के लिए समय पर सुरक्षा जांच और नियमों का पालन बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।