मानसिक उदगारों की शारीरिक कुश्तियां (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Jul 31, 2024

ऐसा माना गया है कि युद्ध कैसा भी हो दिमाग से लड़ा जाता है । एक सच यह भी है कि जितना मर्ज़ी भाषण दो, विदेशी, ब्रांडेड, महंगे कपड़े पहन लो, बड़ा बनने की नहीं दिखने की कोशिश कर लो, इंसान की खसलत नहीं बदलती। पिछले दिनों देश की सबसे बड़ी सभा में दो लड़ाकुओं ने अपनी बातों के दांव पेच दिखा कर साबित करना चाहा कि वे पहलवान हैं और सभा में ही कुश्ती के जौहर दिखा सकते हैं लेकिन बेचारी नौबत थोड़ी सुस्त रही, हाथापाई होते होते रह गई। आरोप और प्रत्यारोपों के बीच वाकयुद्ध खूब हुआ। उनके राजनीतिक शरीरों ने काफी कोशिश की कि नया इतिहास रच दिया जाए लेकिन दिमाग ने होने नहीं दिया। बेचारा वक़्त वंचित रह गया।  अगर इस न हो सकने वाली लोकतान्त्रिक कुश्ती की रीलें बनती और वायरल होती तो भूखी और रोजगार ढूंढती जनता को स्वादिष्ट खाना मिल जाता।

इसे भी पढ़ें: बजट के शुभ अवसर पर (व्यंग्य)

हमारे, विश्वगुरु देश में तो पौराणिक युग से यह रिवायत रही है कि पहले युद्ध में शब्दों से वार किया जाए, आंखे तरेर कर हवा में हाथ हिला हिलाकर भारी भरकम डायलॉग बोले जाएं जिनमें एक से एक तीखे शब्दों का प्रयोग हो ताकि भड़ास, दिमाग और ज़बान से होते हुए माहौल में वीर रस घोल दे। उचित माहौल बन जाने के बाद ही अस्त्र और शस्त्रों का प्रयोग किया जाता था ताकि खून बह सके। लेकिन अब हम सभ्य हो चुके हैं इसलिए ऐसा नहीं कर सकते। 

बड़ी सभाओं के सदस्य किन चीज़ों के वास्तविक ब्रांड हैं यह वे भी जानते हैं। बेचारी व्यवस्था उनकी पहली ज़िम्मेदारी समाज और राष्ट्र कल्याण का अभिनय करने की मानती है। मानसिक उदगारों की शारीरिक कुश्तियां लड़ने से पहले उन्हें वह करना भी सीखना चाहिए।

- संतोष उत्सुक

प्रमुख खबरें

18वें हेबिटेट फिल्म फेस्टिवल का समापन

CRISIL की रिपोर्ट में चेतावनी, West Asia संकट से महंगी होंगी रोजमर्रा की चीजें, बढ़ेगा Inflation

Vastu Tips: बढ़ती जा रही है आर्थिक तंगी? इन 5 वास्तु दोषों से घर में रुक जाती है बरकत

Suryavanshi से निपटने के लिए Pat Cummins का प्लान तैयार, बोले - SRH के पास है प्लान B-C