By दिव्यांशी भदौरिया | Oct 03, 2026
पितृ पक्ष का समय चल रहा है। इस दौरान हम सभी अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। इन 16 दिनों में पितरों की तृप्ति और उनकी आत्मा की शांति के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष के समय पितर अपने परिवार से मिलने धरती पर आते हैं। ऐसे में श्राद्ध पक्ष के समय भोजन, खान-पान और रसोई की पवित्रता या शुद्धता का खासा ध्यान रखा जाता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि श्राद्ध के दौरान घर में क्या बनाएं और क्या नहीं।
पितरों के लिए श्राद्ध का भोजन पूरी तरह से सात्विक होना चाहिए। इसमें प्याज और लहसुन का बिल्कुल इस्तेमाल न करें। इसके साथ ही आपको बताते हैं क्या-क्या खाने में आप बना सकती हैं?
- श्राद्ध की थाली में मुख्य रुप से खीर (विशेषकर चावल और मखाने की), पूड़ी या कचौड़ी और उड़द या मूंग की दाल को शामिल करें।
- मौसमी और सात्विक सब्जियों का ही इस्तेमाल करें। कद्दू, जिमीकंद या सूरन, तोरई, अरबी और कच्चे केले की सब्जी श्राद्ध में बहुत शुभ मानी जाती है।
- गेहूं के आटे की सात्विक रोटियां और चावल की खीर बनाएं।
- भोजन को शुद्ध देसी घी में ही बनाएं। वहीं, भोजन में गुड़ का होना भी काफी जरुरी है, क्योंकि पितरों को गुड़ का प्रयोग प्रिय होता है।
श्राद्ध के भोजन में क्या न बनाएं?
- पितृ पक्ष के समय भूलकर भी खाने में प्याज-लहसुन या हींग का प्रयोग न करें।
- मांस, मछली, अंडे और किसी भी प्रकार के नशे या मांसाहारी वस्तु का सेवन और प्रयोग सख्त वर्जित है। बासी या पहले का रखा हुआ खाना पितरों को कभी भी न दें।
- श्राद्ध के समय खाने में मसूर की दाल, चना दाल, काली उड़द, बैंगन, मूली, गाजर और बासी या कटे हुए फल शामिल न करें।
- भोजन में काला नमक का इस्तेमाल वर्जित माना जाता है। इसके अलावा, पैकेटबंद या डिब्बाबंद चीजों का इस्तेमाल करने से बचें।
पितृ पक्ष में भोजन की शुद्धता का रखते हैं विशेष ध्यान
- ध्यान रहे कि भोजन बनाने वाले व्यक्ति को स्नान करने के बाद पूरी तरह से शुद्ध होकर ही रसोई में प्रवेश करें।
- सबसे पहले बना हुआ भोजन भगवान को और पितरों को समर्पित करें, जिसको 'भोग' कहा जाता है।
- फिर भोजन का एक हिस्सा गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों के लिए निकाले। माना जाता है कि इन जीवी के माध्यम से भोजन सीधे हमारे पितरों तक पहुंच जाता है।
- इस दौरान परिवार के सभी सदस्यों को शांत मन और श्रद्धा भाव से सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।