By अंकित सिंह | Mar 17, 2026
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत बनी हुई है। आज लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए गोयल ने कहा कि भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने के लिए विश्व भर में उत्साह बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में 38 देशों के साथ व्यापारिक समझौते किए गए हैं, जिनसे निर्यातकों को अवसर मिले हैं।
मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि जब ये सभी मुक्त व्यापार समझौते लागू हो जाएंगे, तो भारतीय निर्यातकों के लिए अपार अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि भारत का माल निर्यात पिछले महीने फरवरी तक स्थिर रहा, लेकिन इसमें गिरावट नहीं आई। गोयल ने कहा कि मार्च के पहले सप्ताह में निर्यात में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन दूसरे सप्ताह में इसमें सुधार हुआ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मार्च के अंत तक भारत अपने निर्यात स्तर को बनाए रखने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत के लिए एक नया अध्याय शुरू होने वाला है।
राज्यसभा में प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि मौजूदा वैश्विक स्थिति के मद्देनजर सदन में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय या विदेश मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा कराई जाए। इन नेताओं का कहना है कि पिछले 16 वर्षों में दोनों मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा नहीं हुई है। पत्र में यह भी कहा गया है कि ‘‘वर्तमान वैश्विक स्थिति, ऊर्जा संकट और भारत के लिए आगे की चुनौतियों’’ को देखते हुए यह चर्चा कराई जानी चाहिए। कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, माकपा, भाकपा, आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, राजद, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप), शिवसेना (उबाठा), नेशनल कांफ्रेंस, आईयूएमएल के नेताओं और निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल ने पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
पत्र में कहा गया है कि हस्ताक्षरकर्ता उच्च सदन के लगभग 100 सदस्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। विपक्षी सांसद बजट सत्र के पहले भाग से ही विदेश मंत्रालय या वाणिज्य मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा कराने की मांग उठा रहे हैं। अब तक उच्च सदन ने बजट सत्र में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के कामकाज चर्चा की है, और तीन और मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा होनी है। पत्र में कहा गया है कि 29 मंत्रालय ऐसे हैं जिन पर 2010 के बाद से चर्चा नहीं की गई है।