By नीरज कुमार दुबे | Feb 10, 2026
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मजाक मजाक में अमेरिका को सीधे सीधे वो संदेश दे दिया है जोकि हर भारतीय देना चाह रहा था। हम आपको बता दें कि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने व्यापार और खेल के बीच समानता बताते हुए भारत-अमेरिका संबंधों पर हल्के-फुल्के अंदाज़ में टिप्पणी की है जोकि सोशल मीडिया पर छा गई है। भारत में अमेरिकी राजदूत के आवास पर सोमवार को एक स्वागत समारोह आयोजित किया गया था, जहां हाल में संपन्न भारत-अमेरिका टी20 विश्व कप मुकाबले और दोनों देशों के बीच हुए व्यापार समझौते का संदर्भ एक साथ जुड़ गया।
कार्यक्रम में बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाया गया 18 प्रतिशत शुल्क उन्हें उस अंतर की याद दिलाता है जिससे भारत ने टी20 विश्व कप मैच में अमेरिका को हराया। उन्होंने इस तुलना को पूरी तरह दोस्ताना और सकारात्मक भावना से जोड़ते हुए कहा कि खेल और व्यापार दोनों में प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग की भी बड़ी भूमिका होती है। पीयूष गोयल ने अमेरिकी क्रिकेट टीम के प्रदर्शन की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस देश में क्रिकेट पारंपरिक रूप से लोकप्रिय खेल नहीं रहा और जिसने कुछ ही वर्षों पहले इस खेल को गंभीरता से अपनाया है, उसके लिए ऐसा प्रदर्शन “शानदार” कहा जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी टीम ने जिस स्तर का खेल दिखाया, वह क्रिकेट के वैश्वीकरण का संकेत है और यह बताता है कि खेल अब नए बाजारों और समाजों में भी जगह बना रहा है।
वाणिज्य मंत्री ने मैच के दौरान अमेरिकी राजदूत के साथ हुई एक हल्की-फुल्की बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मैच देखते समय राजदूत ने इस ओर ध्यान दिलाया कि अमेरिका 18 प्रतिशत के अंतर से मैच हारा। इस पर पीयूष गोयल ने मुस्कराते हुए सुझाव दिया कि यदि “रेसिप्रोकल टैरिफ” यानी पारस्परिक शुल्क शून्य कर दिया जाता, तो शायद मैच का नतीजा भी अलग होता। इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया, लेकिन इसके पीछे व्यापारिक संदेश भी छिपा था कि दोनों देश टैरिफ कम कर आपसी व्यापार बढ़ा सकते हैं।
हम आपको बता दें कि यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब भारत और अमेरिका ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते की घोषणा की है। शनिवार को जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने समझौते के मुख्य बिंदुओं को साझा किया। इस समझौते के तहत अमेरिका में प्रवेश करने वाले कई भारतीय उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा। यह फैसला फरवरी 2025 से शुरू हुई लंबी वार्ताओं के बाद संभव हुआ है।
देखा जाये तो भारत के लिए यह समझौता कई क्षेत्रों में राहत लेकर आया है। जिन उत्पादों को लाभ मिलेगा उनमें वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते-चप्पल, प्लास्टिक एवं रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर आइटम, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी उत्पाद शामिल हैं। इन क्षेत्रों में शुल्क घटने से भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और अमेरिकी बाजार में उनकी पहुंच आसान होगी।
दूसरी ओर, भारत ने भी अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क कम करने या समाप्त करने पर सहमति दी है। इसमें अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों की पूरी श्रृंखला के साथ-साथ कृषि और खाद्य उत्पादों का बड़ा दायरा शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा। एक ओर जहां भारतीय निर्यातकों को बड़ा बाजार मिलेगा, वहीं अमेरिकी उत्पादकों के लिए भारत जैसे विशाल उपभोक्ता बाजार में अवसर बढ़ेंगे। साथ ही यह समझौता रणनीतिक साझेदारी को भी गहरा करेगा, क्योंकि व्यापार अक्सर व्यापक कूटनीतिक रिश्तों का आधार बनता है।
बहरहाल, पीयूष गोयल की खेल-प्रेरित टिप्पणी ने यह भी दिखाया कि कूटनीति हमेशा औपचारिक और कठोर भाषा में ही नहीं होती; कभी-कभी हल्का हास्य भी बड़े संदेश दे जाता है। क्रिकेट के मैदान से निकली यह 18 प्रतिशत की तुलना अब भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों की चर्चा में एक यादगार संदर्भ बन चुकी है।