By दिव्यांशी भदौरिया | Jul 13, 2026
कल यानी 14 जुलाई, मंगलवार को आषाढ़ी अमावस्या मनाई जाएगी। अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने का विधान होता है। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इस बार आषाढ़ी अमावस्या मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए इसे भौमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है।
मिथुन राशि
अमावस्या वाले दिन मिथुन राशि के जातक को मानसकि तनाव और स्वास्थ्य अनुकूल रह सकता है। इस अवधि में अज्ञात भय या भ्रम की स्थिति बन सकती है। खासकर इस दौरान वाणी पर नियंत्रण रखना काफी जरुरी है, नहीं तो अपनों से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। इस अवधि में वाद-विवाद से दूर रहना काफी जरुरी है।
कर्क राशि
कर्क राशि वाले इस दौरान भावनात्मक रुप से निर्णय लेने से बचें, नहीं तो धन-हानि होने का डर बन जाएगा। वहीं, चंद्रमा की स्थिति के कारण मन विचलित रह सकता है। इस बात का ध्यान रखें कि, इस समय कोई भी बड़ा आर्थिक निवेश करने से पूरी तरह से बचें और भावनाओं में आकर कोई भी बड़ा महत्वपूर्ण निर्णय न लें।
वृश्चिक राशि
वर्क प्लेस में तनाव और दुर्घटना होने का डर बना रह सकता है। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें। आपके जो छिप हुए शत्रुओं उनसे बचकर रहें, क्योंकि यह आपकी छवि को खराब करने की कोशिश करने में लगा है। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ तालमेल जरुर बिठाए।
मीन राशि
इस दौरान मीन राशि के जातक पारिवारिक कलह और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान जरुर रखें। परिवार के सदस्यों के साथ किसी भी बात को लेकर तनाव देखने को मिल सकता है। हेल्थ लेकर जरा भी लापरवाही न बरतें। अपने खान-पान का विशेष ख्याल रखें।
अमावस्या के प्रभाव को कम करने के सरल उपाय
- दान-पुण्य: इस दिन आपने जरुरतमंद को श्रद्धा के अनुसार तिल, वस्त्र या अन्न का दान करें।
- पितृ तर्पण: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि पूरी तरह पितरों को समर्पित है, इसलिए उनके निमित्त तपर्ण या धूप देकर उनका स्मरण करें।
- मंत्र जाप: भगवान शिव के इन मंत्रों का जप करें। 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम एक माला मानसिक जप जरुर करें।
अमावस्या की तिथि समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या 13 जुलाई को शाम 06 बजकर 50 पर शुरु होगी। वहीं, इसका समापन 14 जुलाई को दोपहर 03 बजकर 13 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार इस बार आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को मनाई जाएगी।