‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर PM मोदी की बैठक आज, ममता नहीं होंगी शामिल

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 19, 2019

नयी दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राजनीतिक दलों के प्रमुखों की यहां बुधवार को होने वाली बैठक में भाग लेने का निमंत्रण मंगलवार को अस्वीकार कर दिया और केंद्र से ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर विचार विमर्श के लिए एक श्वेत पत्र तैयार करने को कहा। मोदी ने लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के मामले समेत अन्य विषयों पर चर्चा के लिए यह बैठक बुलाई है। मोदी ने उन सभी दलों के प्रमुखों को 19 जून को बैठक के लिए आमंत्रित किया है जिनका लोकसभा या राज्यसभा में कम से कम एक सदस्य है। इस बैठक में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विचार, 2022 में आजादी के 75 वर्ष के जश्न, महात्मा गांधी के इस साल 150वें जयंती वर्ष को मनाने समेत कई मामलों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद 20 जून को सभी सांसद रात्रिभोज के समय बैठक करेंगे।

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उन्होंने कहा, ‘‘ ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ जैसे संवेदनशील एवं गंभीर विषय पर इतने कम समय में जवाब देने से इस विषय के साथ न्याय नहीं होगा। इस विषय को संवैधानिक विशेषज्ञों, चुनावी विशेषज्ञों और पार्टी सदस्यों के साथ विचार-विमर्श की आवश्यकता है।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘मैं अनुरोध करूंगी कि इस मामले पर जल्दबाजी में कदम उठाने के बजाय, आप कृपया सभी राजनीतिक दलों को इस विषय पर एक श्वेत पत्र भेजें जिसमें उनसे अपने विचार व्यक्त करने को कहा जाए। इसके लिए उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए। यदि आप ऐसा करते हैं, तभी हम इस महत्वपूर्ण विषय पर ठोस सुझाव दे पाएंगे।’’ बनर्जी ने कहा कि पिछड़े जिलों के विकास के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस पहले ही अपने विचारों से उन्हें अवगत करा चुकी है कि वह कुछ जिलों के चयन के समर्थन में नहीं हैं क्योंकि इससे राज्य के सभी जिलों के संतुलित एवं समान विकास का समग्र लक्ष्य पूरा नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा राज्य सभी जिलों का समान सामाजिक एवं आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि क्षेत्रीय असंतुलन पैदा नहीं हो।’’ ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि वह और उनका दल 2022 में आजादी के 75 वर्ष के जश्न और महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष समारोहों में बढ़-चढ़ कर भाग लेंगे, लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि जहां तक संसद की उत्पादकता में सुधार के तरीकों का मामला है तो संसदीय मंत्रालय सभी दलों के साथ इस मामले पर विचार-विमर्श कर सकते हैं। 

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