Modi Trump Meeting In France | G7 Summit में प्रधानमंत्री मोदी की एंट्री! क्या ट्रंप के साथ होने वाली इस 'महाबैठक' से बदलेगा दुनिया का समीकरण?

By रेनू तिवारी | Jun 16, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस के एवियन पहुंचेंगे। वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों के बीच हो रही यह समिट बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरे में दुनिया भर की नज़रें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हुई हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी के आगमन पर उनका औपचारिक स्वागत करेंगे। इसके बाद, PM मोदी G7 देशों के राष्ट्राध्यक्षों, आमंत्रित भागीदार देशों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ "नई पार्टनरशिप बनाना और इंटरनेशनल एकजुटता को फिर से कायम करना" थीम वाले वर्किंग सेशन में शामिल होंगे।

हालांकि प्रधानमंत्री का डिप्लोमैटिक शेड्यूल काफी व्यस्त है, लेकिन सबसे ज़्यादा ध्यान 17 जून को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली उनकी द्विपक्षीय मीटिंग पर रहेगा। यह मीटिंग दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने की पहली बातचीत होगी, जो ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद इस साल की शुरुआत में PM मोदी के वाशिंगटन दौरे के बाद हो रही है।

यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में कई चुनौतियां आई हैं। व्यापार, टैरिफ, क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों और रूस के साथ भारत के एनर्जी संबंधों को लेकर मतभेदों ने मज़बूत स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में कुछ खटास पैदा की है।

द्विपक्षीय बातचीत के दौरान भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इस डील पर बातचीत कई महीनों से चल रही है और दोनों पक्ष मार्केट तक पहुंच बढ़ाने और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं। वाशिंगटन को एनर्जी, इंडस्ट्रियल सामान और कुछ खास एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स जैसे सेक्टर में भारत को एक्सपोर्ट बढ़ाने के बड़े मौके दिख रहे हैं।

हालांकि, दोनों देशों के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भले ही कुछ प्रगति हुई है, लेकिन समिट के दौरान समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना कम है। नई दिल्ली के लिए एक संतुलित व्यापार व्यवस्था हासिल करना महत्वपूर्ण है, खासकर इसलिए क्योंकि हाल ही में अमेरिका के टैरिफ उपायों से भारतीय एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है।

ईरान विवाद

मोदी-ट्रंप की मीटिंग ईरान विवाद से जुड़े बढ़ते तनाव के माहौल में भी होगी, एक ऐसा मुद्दा जिसका भारत पर सीधा असर पड़ता है। नई दिल्ली ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास चलने वाले कमर्शियल ऑयल टैंकरों पर हालिया हमलों पर चिंता जताई है, जो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए एक अहम रास्ता है। हाल ही में इस इलाके में हुए मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान भारतीय नाविकों वाले कई जहाज़ प्रभावित हुए, जिससे भारतीय क्रू मेंबर हताहत हुए।

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इन घटनाओं के बाद भारत ने वॉशिंगटन के सामने कड़ा डिप्लोमैटिक विरोध दर्ज कराया और संयम बरतने, बातचीत करने और विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की अपनी मांग दोहराई। उम्मीद है कि इस मुद्दे पर बातचीत होगी क्योंकि दोनों देश व्यापक रणनीतिक सहयोग बनाए रखते हुए अपने मतभेदों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।

G7 में भारत की भूमिका

इस साल का समिट G7 में भारत की 13वीं भागीदारी है और प्रधानमंत्री मोदी लगातार सातवीं बार इसमें शामिल हो रहे हैं। हालांकि भारत G7 समूह का सदस्य नहीं है, लेकिन इसकी नियमित मौजूदगी वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में इसके बढ़ते प्रभाव और आर्थिक विकास व जलवायु परिवर्तन से लेकर टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों को हल करने में इसके महत्व को दर्शाती है।

इनोवेशन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, मैन्युफैक्चरिंग और मज़बूत सप्लाई चेन में अपनी बढ़ती भूमिका के कारण भी भारत का कद बढ़ा है। G7 की फ्रांसीसी अध्यक्षता द्वारा तय की गई कई प्राथमिकताएं - जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और वैश्विक असंतुलन को कम करना शामिल है - भारत की खूबियों और नीतिगत लक्ष्यों से काफी हद तक मेल खाती हैं।

ट्रंप के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी समिट के दौरान कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इनमें कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बातचीत शामिल है।

इन बैठकों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा सहयोग, टेक्नोलॉजी साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके बाद, प्रधानमंत्री हिस्सा लेने वाले नेताओं के लिए राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा आयोजित गाला डिनर में शामिल होंगे।

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