By एकता | Jun 07, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेजर अभिलाषा बराक को 'संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' मिलने पर ढेरों बधाई दी हैं। प्रधानमंत्री ने देश और मानवता के लिए उनकी 'उत्कृष्ट सेवा' की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि मेजर बराक की यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय युवाओं और खासकर उन लड़कियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो समाज और देश की सेवा करना चाहती हैं। आपको बता दें कि मेजर बराक भारत की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं और वह यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड पाने वाली देश की तीसरी महिला अधिकारी बन गई हैं।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पुरस्कार देते हुए मेजर बराक की तारीफ में कहा कि वह उन सभी लोगों के लिए एक आदर्श हैं जिनकी वह सेवा करती हैं और जिनके साथ काम करती हैं।
इस बड़े सम्मान को हासिल करने के बाद लेबनान में तैनात मेजर बराक ने एक बेहद खूबसूरत बात कही। उन्होंने कहा, "सपनों का कोई जेंडर नहीं होता और न ही लीडरशिप, साहस या मानवता की सेवा करने की इच्छाशक्ति का कोई जेंडर होता है।" उन्होंने आगे कहा कि यह पुरस्कार इस बात की याद दिलाता है कि दुनिया में स्थायी शांति तभी आ सकती है जब हर किसी की आवाज सुनी जाए और सबको आगे बढ़ने के बराबर मौके मिलें। आपको बता दें कि लेबनान इस समय संयुक्त राष्ट्र का सबसे खतरनाक शांति-स्थापना वाला इलाका माना जाता है।
संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव लिसा बटेनहेम और यूएन चीफ गुटेरेस ने बताया कि मेजर बराक ने एक फ्रंटलाइन कमांडर के रूप में कमाल का काम किया है। उन्होंने स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर एक मजबूत भरोसा कायम किया, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिली। इसके अलावा, उन्होंने हजारों महिलाओं और लड़कियों से सीधे जुड़कर उन्हें स्किल ट्रेनिंग, एजुकेशन और हेल्थ से जुड़े कार्यक्रमों का फायदा पहुंचाया, जिससे उन लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है।
मेजर बराक भारत की तीसरी महिला अधिकारी हैं जिन्हें यह मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड मिला है। उनसे पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को यह सम्मान मिल चुका है। वह इस समय इजरायल और लेबनान की सीमा पर तैनात यूएन मिशन में भारतीय बटालियन के साथ जिम्मेदारी संभाल रही हैं, जिसे वर्तमान में सबसे जोखिमभरा मिशन माना जाता है।
साल 2018 में आर्मी एयर डिफेंस कोर में शामिल होने के बाद, उन्होंने 2022 में नासिक के कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल से ग्रेजुएशन पूरा करके इतिहास रचा था। अपने सफर को याद करते हुए मेजर बराक ने कहा, "भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट होने के नाते मैंने खुद यह महसूस किया है कि जब भी महिलाओं को सही अवसर मिलता है, तो वे हर बाधा को पार करके बड़े से बड़ा मुकाम हासिल कर सकती हैं।"