By अंकित सिंह | Jan 19, 2026
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सिर्फ चार महीने बचे हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जनवरी को चेन्नई से लगभग 100 किलोमीटर दूर मदुरंथकम में एक विशाल रैली के साथ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए चुनावी बिगुल बजाने वाले हैं। जानकारी के अनुसार, इस भव्य जनसभा ने राज्य भाजपा नेतृत्व को पूरी तैयारियों में जुट जाने को मजबूर कर दिया है। ऐसी चर्चाएं तेज हैं कि यह रैली एनडीए में शामिल होने वाले नए सहयोगियों की औपचारिक घोषणा का मंच बन सकती है।
एआईएडीएमके ने पीएमके के एक गुट के साथ गठबंधन कर लिया है। पार्टी के संस्थापक डॉ. रामदास द्वारा अपने बेटे अंबुमणि रामदास को निष्कासित करने के बाद पार्टी में फूट पड़ गई है। पिता ने अभी तक गठबंधन को लेकर अपना अंतिम रुख स्पष्ट नहीं किया है, जबकि अंबुमणि पहले ही एआईएडीएमके के साथ जुड़कर एनडीए का समर्थन कर चुके हैं। राज्य में सत्तारूढ़ डीएमके-कांग्रेस गठबंधन को चुनौती देने के लिए एआईएडीएमके और भाजपा दोनों ही एक मजबूत एनडीए गठबंधन बनाने के लिए आक्रामक प्रयास कर रही हैं। अभिनेता विजय की पार्टी (टीवीके) का उदय भी आगामी चुनाव में एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। रजनीकांत और कमल हासन के विपरीत, विजय की लोकप्रियता चरम पर है, जो उनके राजनीतिक प्रवेश को भी प्रभावशाली बनाती है।
टीवीके ने डीएमके और बीजेपी दोनों से खुलकर दूरी बनाए रखी है। हालांकि, एआईएडीएमके के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि उसके कुछ नेता विजय की टीम के साथ पर्दे के पीछे बातचीत कर रहे हैं। इससे इस बात को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं कि अगर टीवीके और एआईएडीएमके के बीच कोई समझौता हो जाता है तो बीजेपी का क्या रुख होगा। विजय के हालिया विवाद, जिनमें उनकी फिल्म जननायगन के सेंसर सर्टिफिकेट में देरी और करूर मामले में सीबीआई द्वारा उनसे पूछताछ शामिल है, को तमिलनाडु में बीजेपी द्वारा राजनीतिक निशाना बनाए जाने के रूप में पेश किया जा रहा है।