Viksit Bharat का संकल्प: PM Modi बोले- गुलामी के प्रतीक मिटाकर बना रहे स्वतंत्र भारत की पहचान

By अंकित सिंह | Feb 13, 2026

सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन 1 और 2 का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज हम सभी एक नए इतिहास के साक्षी बन रहे हैं। 13 फरवरी का यह दिन भारत के विकास पथ में एक नई शुरुआत का गवाह है। आज हम सभी विकसित भारत का संकल्प लेकर सेवा तीर्थ में, कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं। अपने लक्ष्य में विजयी होने का दैवीय आशीर्वाद हमारे साथ है। उन्होंने कहा कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें, जो ब्रिटिश सोच की हुकूमत को लागू करने के लिए बनी थीं, वहीं आज सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं।

 

इसे भी पढ़ें: India-US Trade Deal से किसानों को खतरा? Minister Shivraj Singh Chauhan बोले- विपक्ष का झूठ, सब सुरक्षित


मोदी ने कहा कि यहां से जो फैसले होंगे, वे किसी महाराजा की सोच को नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे। इसी अमृत भावना के साथ आज मैं ये सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन भारत की जनता को समर्पित कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि इस समय 21वीं सदी का पहला क्वार्टर पूरा हो चुका है। यह आवश्यक है कि विकसित भारत की कल्पना केवल नीतियों और योजनाओं में ही नहीं, बल्कि हमारे कार्यस्थलों और इमारतों में भी दिखाई दे। जहां से देश का संचालन होता है, वह जगह प्रभावी भी होनी चाहिए और प्रेरणादायी भी होनी चाहिए। 


प्रधानमंत्री ने कहा कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसे पुराने भवनों में जगह की कमी थी, सुविधाओं की भी अपनी सीमाएं थीं। करीब 100 साल पुरानी ये इमारतें भीतर से जर्जर होती जा रही थीं। इसके अलावा भी अनेक चुनौतियां थीं। मैं समझता हूं कि इन चुनौतियों के बारे में बताया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जैसे, आजादी के इतने सालों बाद भी दिल्ली सरकार के अनेक मंत्रालय दिल्ली के 50 से भी ज्यादा स्थानों से चल रहे हैं। प्रतिवर्ष इन स्थानों के किराये में डेढ़ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। हर रोज 8–10 हजार कर्मचारियों को एक इमारत से दूसरी इमारत में जाने का लॉजिस्टिक खर्च अलग होता था। अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों के निर्माण से ये खर्च कम होगा, समय बचेगा और प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी। 


नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा में यह बहुत जरूरी है कि भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर आगे बढ़े। दुर्भाग्य है कि आजादी के बाद भी हमारे यहां गुलामी के प्रतीकों को ढोया जाता रहा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हमने गुलामी की मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया। हमने वीरों के नाम पर नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया। हमने पुलिस की वीरता को सम्मान देने के लिए पुलिस स्मारक बनाया। रेसकोर्स का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। यह केवल नाम बदलने का निर्णय नहीं था, यह सत्ता के मिज़ाज को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था। 

 

इसे भी पढ़ें: डीपफेक का धोखा और डिजिटल सख्त नियमों की अनिवार्यता


मोदी ने कहा कि हमारे इन फैसलों के पीछे एक गहरी भावना है, एक विजन है, जो हमारे वर्तमान, हमारे अतीत और हमारे भविष्य को भारत के गौरव से जोड़ता है। जिस जगह को पहले राजपथ के नाम से जाना जाता था, वहां न पर्याप्त सुविधाएं थीं और न ही आम नागरिकों के लिए समुचित व्यवस्था। हमने उसे कर्तव्य पथ के रूप में विकसित किया और आज वह स्थान परिवारों, बच्चों और देशभर से आने वाले नागरिकों के लिए जीवंत स्थल बन चुका है। नाम बदलने की पहल केवल शब्दों का बदलाव नहीं है, इन सभी प्रयासों के पीछे वैचारिक सूत्रता एक ही है— स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान। गुलामी से मुक्त निशान। 

All the updates here:

प्रमुख खबरें

Winter Olympics 2026: 48 साल बाद बैन Backflip की वापसी, Ilia Malinin ने रचा इतिहास

Gaurav Gogoi का CM Himanta पर सीधा हमला, बताया Assam का सबसे असफल मुख्यमंत्री

Manipur हिंसा मामलों की निगरानी करेगा High Court? Supreme Court ने दिया अहम सुझाव

आंदोलन, हिंसा, तख्ता पलट और बहुमत... बांग्लादेश ने डेढ़-दो साल में बहुत कुछ देख लिया