देश पर गैस संकट आया तो Modi ने समुद्र मंथन करवा कर खोज ली गैस, Andaman Sea में मिला Natural Gas का बड़ा भंडार

By नीरज कुमार दुबे | Jun 06, 2026

अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस की नई खोज ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री रणनीति को नई मजबूती दी है। हम आपको बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग पंद्रह किलोमीटर दूर श्री विजयपुरम-3 नामक खोजी कुएं में प्राकृतिक गैस की उपस्थिति की पुष्टि की है। यह खोज भारत के समुद्री ऊर्जा अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इससे देश के गहरे समुद्री क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

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यह खोज अंडमान अपतटीय क्षेत्र एएन ओएसएचपी 2018-एक में की गई है, जिसे खुला क्षेत्र अनुज्ञा नीति के तहत आवंटित किया गया था। ऑयल इंडिया लिमिटेड ने बताया कि वर्तमान खोज अभियान के दौरान अब तक तीन खोजी कुएं खोदे गए हैं, जिनमें से दो में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अंडमान बेसिन में ऊर्जा संसाधनों की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

कंपनी अब गैस के नमूनों का परीक्षण कर रही है ताकि उसकी संरचना, ऊष्मीय क्षमता और उत्पत्ति का पता लगाया जा सके। इसके लिए समस्थानिक अध्ययन भी किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे यह समझने में सहायता मिलेगी कि गैस किस प्रकार बनी और उसका स्रोत क्या है। यह जानकारी भविष्य की खोज योजनाओं को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने में सहायक होगी।

इस उपलब्धि को केंद्र सरकार के समुद्र मंथन मिशन के तहत मिली सफलता के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर इस राष्ट्रीय गहरे समुद्री खोज अभियान की घोषणा की थी। मिशन का उद्देश्य भारत के अपतटीय क्षेत्रों में गहरे और अति गहरे समुद्री हिस्सों में ऊर्जा संसाधनों की खोज को तेज करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के हाइड्रोकार्बन भंडार का पूर्ण उपयोग करने के लिए आने वाले वर्षों में अनेक गहरे समुद्री कुएं खोदे जाएंगे। इसके लिए वैश्विक विशेषज्ञों के साथ समन्वय स्थापित करने की भी योजना है।

सितंबर 2025 में ऑयल इंडिया लिमिटेड ने विजयपुरम दो नामक दूसरे खोजी कुएं में भी प्राकृतिक गैस मिलने की जानकारी दी थी। उसके बाद कंपनी ने क्षेत्र में विस्तृत मूल्यांकन कार्यक्रम शुरू किया। इसके अंतर्गत उपलब्ध द्वि आयामी भूकंपीय आंकड़ों का पुनः विश्लेषण किया जा रहा है तथा अतिरिक्त छह सौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में त्रि आयामी भूकंपीय सर्वेक्षण भी पूरा किया जा चुका है। इन आंकड़ों के विश्लेषण के बाद आगे मूल्यांकन कुओं की खुदाई की जाएगी।

देखा जाये तो यह खोज ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक तेल बाजार अस्थिर बना हुआ है। पश्चिम एशिया लंबे समय से दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल रहा है और वहां किसी भी सैन्य या राजनीतिक तनाव का सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए पश्चिम एशिया में संकट बढ़ने पर देश को महंगे तेल और आपूर्ति बाधा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

अंडमान सागर में गैस मिलने से भारत को कई रणनीतिक लाभ प्राप्त हो सकते हैं। सबसे बड़ा लाभ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती है। यदि इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर गैस भंडार विकसित होते हैं तो आयातित ईंधन पर निर्भरता कम की जा सकेगी। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और वैश्विक कीमतों में उतार चढ़ाव का असर भी सीमित रहेगा।

एक और महत्वपूर्ण लाभ सामरिक दृष्टि से है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत बनाते हैं। वहां ऊर्जा संसाधनों का विकास समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक उपस्थिति को भी नया आधार देगा। इससे भारत हिंद महासागर में अपनी आर्थिक और सामरिक पकड़ को और मजबूत कर सकेगा।

एक और लाभ औद्योगिक विकास से जुड़ा है। प्राकृतिक गैस उर्वरक, बिजली उत्पादन, पेट्रोरसायन और स्वच्छ ईंधन जैसे क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। घरेलू गैस उत्पादन बढ़ने से उद्योगों को स्थिर और अपेक्षाकृत सस्ती ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी। इससे रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।

उधर, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस उपलब्धि पर ऑयल इंडिया लिमिटेड को बधाई देते हुए कहा है कि अंडमान सागर में ऊर्जा संभावनाओं का नया महासागर सामने आया है। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि श्री विजयपुरम-3 खोजी कुएं में प्राकृतिक गैस की उपस्थिति भारत के गहरे समुद्री ऊर्जा अभियान के लिए अत्यंत उत्साहजनक संकेत है। हरदीप पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित समुद्र मंथन मिशन के अंतर्गत देश के अपतटीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में गहरे और अति गहरे समुद्री कुएं खोदे जाने की योजना है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अंडमान बेसिन में अब तक तीन में से दो खोजी कुओं में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी मिलना भारत की ऊर्जा खोज महत्वाकांक्षाओं को नई दिशा देगा तथा वैश्विक गहरे समुद्री विशेषज्ञों के सहयोग से भविष्य की खोज गतिविधियों को और गति मिलेगी।

बहरहाल, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंडमान बेसिन में आगे भी सफल खोजें होती हैं तो भारत ऊर्जा क्षेत्र में एक नई दिशा प्राप्त कर सकता है। समुद्र मंथन मिशन के तहत हो रही यह खोज केवल गैस मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और सामरिक शक्ति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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