पीएम नरेंद्र मोदी का विज्ञान कांग्रेस में संबोधन, कोरोना के दो साल बाद हो रहा आयोजन

By रितिका कमठान | Jan 03, 2023

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय विज्ञान कांग्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि आज का भारत जिस साइंटिफिक अप्रोच के साथ आगे बढ़ रहा है, हम उसके नतीजे भी देख रहे हैं। साइंस के क्षेत्र में भारत तेजी से विश्व के टॉप देशों में शामिल हो रहा है। भारत स्टार्टअप्स में शीर्ष तीन देशों में शामिल है। वर्ष 2015 तक हम 130 देशों के ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स पर भारत का स्थान 81वां रहा है। भारत वर्ष 2022 में इस सूची में 40वें स्थान पर पहुंचा है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि खेल में भारत नई उचाईंयों को छू रहा है। हाईड्रोजन योजना पर भी काफी अहमियत रखने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि विकास के लिए खोजी प्रकृति होना जरुरी है। बता दें कि भारतीय विज्ञान कांग्रेस का आयोजन पांच दिनों तक जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि भारत में रिसर्च को बढ़ावा दिए जाने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि विकास के लिए खोजी प्रवत्ति होना जरुरी है। पीएम मोदी ने स्टार्ट अप को लेकर भी जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि भारत में अब स्टार्टअप काफी बड़ी संख्या में किया गया है। स्टार्ट अप को लेकर टॉप तीन देशों में भारत का भी नाम शामिल है। उन्होंने कहा कि अगले 25 वर्षों में भारत जिस ऊंचाई पर होगा, उसमें भारत की वैज्ञानिक शक्ति की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी। साइंस में पैशन के साथ जब देश की सेवा का संकल्प जुड़ जाता है तो नतीजे भी अभूतपूर्व आते हैं। विज्ञान के प्रयास महत्वपूर्ण उपलब्धियों में तभी बदल सकते हैं जब वे 'प्रयोगशाला से जमीन' तक पहुंचें और जब उनका प्रभाव 'वैश्विक स्तर से जमीनी स्तर' तक हो। उन्होंने कहा कि साइंस के प्रयास, बड़ी उपलब्धियों में तभी बदल सकते हैं, जब वो लैब से निकलकर लैंड तक पहुंचे। जब उसका प्रभाव ग्लोबल से लोकर ग्रासरूट तक हो, जब उसका विस्तार जर्नल्स से लेकर जमीन तक हो, जब उससे बदलाव रिसर्च से होते हुए रियल लाइफ में दिखने लगे।

जी 20 का भी किया जिक्र
उन्होंने कहा कि अभी भारत को जी-20 अध्यक्षता की जिम्मेदारी मिली है। जी-20 के प्रमुख विषयों में भी वुमन लीड डेवलपमेंट एक बड़ी प्राथमिकता का विषय है। बीते 8 वर्षों में भारत ने गवर्नेंस से लेकर सोसाइटी और इकोनॉमिक तक इस दिशा में कई ऐसे असाधारण काम किए हैं, जिनकी आज चर्चा हो रही है। भारत की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए, भारत में साइंस का विकास, हमारे वैज्ञानिक समुदाय की मूल प्रेरणा होनी चाहिए। भारत में साइंस, भारत को आत्मनिर्भर बनाने वाली होनी चाहिए।

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