LK Advani के 100वें वर्ष में प्रवेश पर PM Modi ने की सराहना, बताया वैचारिक स्पष्टता का प्रतीक

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 08, 2026

नयी दिल्ली, आठ नवंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की वैचारिक स्पष्टता एवं बौद्धिक प्रखरता और भारतीय राजनीति में लंबे समय तक हावी रही छद्म धर्मनिरपेक्षता की वास्तविकता को उजागर करने का उनका तरीका ऐसी दो विशेषताएं हैं, जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देती हैं। मोदी ने आडवाणी के जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर रविवार को प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित अपने एक लेख में यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व उपप्रधानमंत्री आडवाणी ने आपसी सहयोग की एक अनूठी मिसाल पेश की और दोनों ने मिलकर भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी। उन्होंने कहा, ‘‘यहां मैं आडवाणी जी के व्यक्तित्व की दो ऐसी विशेषताओं का उल्लेख करना चाहूंगा, जो एक नेता के रूप में उन्हें अलग पहचान देती हैं।

पहली है, उनकी वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक प्रखरता। उनके भाषणों और लेखन में इसकी झलक साफ दिखाई देती थी।’’ मोदी ने ‘आडवाणी जी: एक शताब्दी की ओर बढ़ती प्रेरणादायी यात्रा’ शीर्षक वाले लेख में कहा, ‘‘दूसरी विशेषता थी, भारतीय राजनीति में लंबे समय तक हावी रही छद्म धर्मनिरपेक्षता को लेकर उनका स्पष्ट और निर्भीक रुख। उन्होंने देश के राजनीतिक विमर्श में इस प्रवृत्ति की वास्तविकता को उजागर किया।’’ मोदी ने कहा, ‘‘आज आठ नवंबर को लालकृष्ण आडवाणी अपने जीवन के सौवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।

ये कितना सुखद संयोग है कि आज ही दीपावली का पावन पर्व भी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसी वर्ष हम जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती भी मना रहे हैं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि आडवाणी का जन्म आठ नवंबर 1927 को देव दीपावली के दिन हुआ था और 1947 में युवावस्था में उन्हें विभाजन की पीड़ा सहनी पड़ी थी तथा उन्हें सिंध में अपना घर और जानी-पहचानी दुनिया छोड़कर आना पड़ा था। मोदी ने कहा कि आडवाणी ने बिना किसी कड़वाहट के शून्य से अपने जीवन की नयी शुरुआत की और विपरीत परिस्थितियों में नए सिरे से कुछ खड़ा करने का उनका यह संकल्प जीवनभर उनके साथ रहा। उन्होंने कहा, ‘‘जनसंघ को मजबूत बनाने और बाद में भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में भी उनका यही गुण सामने आया।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल में देश की राजनीति ने बड़े बदलाव देखे। कांग्रेस की सीट 1989 में 400 से घटकर 200 से भी नीचे आ गईं। भाजपा 1996 में पहली बार देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि आडवाणी ने कार्यकर्ताओं की अनेक पीढ़ियों को तैयार किया और ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत पर भाजपा की मजबूत नींव रखी।

उन्होंने कहा, ‘‘आडवाणी जी को जो भी जिम्मेदारी मिली, उन्होंने उसे पूरी निष्ठा और लगन से निभाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में उन्होंने सबसे पहले राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया। इसके बाद वह दिल्ली आए, जहां उन्हें अटल जी के साथ मिलकर काम करने का अवसर मिला।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि 1970 के दशक में आडवाणी की संसदीय यात्रा शुरू हुई और संसद में उनकी सक्रिय भागीदारी की सभी राजनीतिक दलों ने सराहना की।

उन्होंने कहा कि आडवाणी ने एक सांसद के रूप में, संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता के रूप में और सत्ता पक्ष में रहते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि आपातकाल आडवाणी के जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था और उस दौर में वह लोकतंत्र को बचाने तथा संविधान की रक्षा के संघर्ष में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। उन्होंने कहा, ‘‘आपातकाल के दौरान उन्होंने जो कुछ देखा, अनुभव किया और महसूस किया, उसकी झलक उनकी पुस्तक ‘ए प्रिजनर्स स्क्रैप-बुक’ में भी मिलती है।

इस पुस्तक का एक हिस्सा है—‘ए टेल ऑफ टू इमरजेंसीज’। इसमें उन्होंने जून 1975 से भारत में शुरू हुई घटनाओं और 1933 में हिटलर के शासन के दौरान जर्मनी में हुई घटनाओं के बीच आश्चर्यजनक समानताओं का बहुत प्रभावी ढंग से वर्णन किया है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि आडवाणी विपक्ष में जितने प्रखर नेता रहे, प्रशासन में भी उतने ही कुशल साबित हुए। उन्होंने कहा, ‘‘उप प्रधानमंत्री और देश में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले गृह मंत्रियों में से एक के रूप में उन्होंने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।’’ मोदी ने कहा कि सुरक्षा बलों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए आडवाणी के प्रयासों को आज भी बड़े आदर और आत्मीयता से याद किया जाता है तथा आतंकवाद के खिलाफ उनके स्पष्ट और दृढ़ रुख के कारण देश को आतंकवाद से निपटने के लिए एक सख्त कानून मिला।

उन्होंने कहा, ‘‘सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा आडवाणी जी के जीवन का एक ऐतिहासिक अध्याय है। इस यात्रा ने भारतीय समाज को एक नयी और सकारात्मक दिशा दी।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि वह स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें इस ऐतिहासिक यात्रा की परिकल्पना से लेकर उसकी तैयारियों और उसे आगे बढ़ाने तक हर चरण में योगदान देने का अवसर मिला। मोदी ने कहा कि बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी के ‘‘दुखद क्षण’’ भी उनकी स्मृतियों में आज तक ताजा हैं और इसके बाद गुजरात में भाजपा ने चिमनभाई पटेल की सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके पीछे संदेश बिल्कुल स्पष्ट था...अपनी विचारधारा और राम मंदिर के निर्माण के संकल्प पर कोई समझौता नहीं होगा।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा के अनेक वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शपथ ली थी कि चाहे कितनी भी बाधाएं आएं, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होकर ही रहेगा तथा वर्षों बाद जनता के आशीर्वाद से अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बनने का सपना साकार हुआ। मोदी ने कहा कि आडवाणी ने अपने आचरण से हमेशा सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और शुचिता का उदाहरण प्रस्तुत किया।

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