PoK Election: शुरुआती दो चरणों की 34 में से 24 सीटें जीतकर PML-N की वापसी तय

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 06, 2026

इस्लामाबाद, छह अगस्त (एपी) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव के पहले दो चरणों के नतीजों में बुधवार को सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने स्पष्ट बढ़त बना ली। यह बढ़त ऐसे समय मिली है, जब पिछले कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं और एक प्रतिबंधित संगठन ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया हैं। क्षेत्रीय चुनाव आयोग के प्रवक्ता राजा शकील ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली पीएमएल-एन समर्थित उम्मीदवारों ने पहले दो चरणों में 34 में से 24 सीट पर जीत हासिल की है।

शकील ने बताया कि सुरक्षा चिंताओं और भारी मानसूनी बारिश के कारण चुनाव तीन चरण में कराए जा रहे हैं। बारिश के कारण चुनाव प्रचार प्रभावित हुआ और खुले मैदान में बड़ी जनसभाओं का आयोजन मुश्किल हो गया। क्षेत्रीय सरकार और चुनाव अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा चिंताओं तथा प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) द्वारा चुनाव बहिष्कार की अपील के बावजूद मुजफ्फराबाद सहित कई क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ।

जेएएसी हिंसक प्रदर्शनों के लिए कुख्यात रहा है। नवाज शरीफ ने एक बयान जारी कर विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी। भारत और पाकिस्तान, दोनों कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों का प्रशासन चलाते हैं, लेकिन दोनों ही पूरे कश्मीर पर अपना दावा करते हैं।

रविवार को मतदान से पहले जेएएसी समर्थकों और पुलिस के बीच कई बार झड़पें हुईं। हालांकि स्थानीय लोगों ने बताया कि हिंसा की आशंका के बावजूद उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को मजबूत किया है, क्योंकि लोगों ने कई सप्ताह तक चले विरोध प्रदर्शनों, हिंसा और बहिष्कार अभियान के बावजूद मतदान किया।

विवाद का मुख्य कारण 12 आरक्षित सीट हैं, जो ब्रिटिश शासन समाप्त होने के बाद भारत के हिस्से वाले कश्मीर से विस्थापित लोगों के लिए निर्धारित की गई हैं। जेएएसी का तर्क है कि इन सीटों के कारण पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से बाहर रहने वाले लोगों को असंगत राजनीतिक प्रभाव मिलता है। संगठन इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है।

विवाद उस समय और बढ़ गया, जब जून में क्षेत्र के उच्चतम न्यायालय ने फैसला दिया कि ये सीटें संविधान द्वारा संरक्षित हैं और संवैधानिक संशोधन के बिना इन्हें समाप्त नहीं किया जा सकता। अधिकारी अक्सर जेएएसी समर्थकों पर चुनाव बाधित करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हैं। उनका यह भी आरोप है कि पाकिस्तानी तालिबान के सदस्य इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो गए थे।

हालांकि जेएएसी ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वर्ष 2023 में गठित जेएएसी कश्मीर के लोगों के लिए अधिक राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रहा है। सरकार का कहना है कि उसने संगठन की 38 में से 36 मांग स्वीकार कर ली हैं, जबकि आरक्षित सीटों का मुद्दा केवल विधानसभा के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है।

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