By रेनू तिवारी | Oct 30, 2026
इज़राइल के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर भूचाल आ गया है। शुक्रवार को जारी आधिकारिक और अंतिम चुनावी परिणामों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गठबंधन एक बार फिर देश के सबसे बड़े राजनीतिक गुट के रूप में उभरा है, लेकिन वह इज़राइली संसद (नेसेट) में बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर रह गया है। इस त्रिशंकु नतीजों के बाद देश में लंबी और पेचीदा गठबंधन वार्ताओं का दौर शुरू होने की पूरी संभावना है, और यदि पार्टियां किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच पाती हैं, तो इज़राइल को एक बार फिर मध्यावधि चुनावों का सामना करना पड़ सकता है। नई नेसेट का आधिकारिक शपथ ग्रहण समारोह आगामी 10 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। अरब राजनीतिक समूहों - 'राम' (Raam) और 'जॉइंट लिस्ट' (Joint List) - ने कुल 19 सीटें जीती हैं। ये समूह 'किंगमेकर' की भूमिका निभा सकते हैं और अगली सरकार तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
ये अंतिम नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। गुरुवार को नेतन्याहू के खेमे ने आरोप लगाया था कि अरब-इज़राइली समूहों को चुनाव प्रभावित करने के लिए विदेशी फंडिंग मिली है। अरब-बहुमत वाले समूहों और कतर ने इन दावों को खारिज कर दिया है; इन आरोपों का कोई सबूत भी नहीं मिला है।
इज़राइल की घरेलू सुरक्षा एजेंसी, 'शिन बेट' (Shin Bet) ने पुष्टि की है कि वह कुछ संदिग्ध अनियमितताओं की जांच कर रही है। हालांकि, एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इस जांच का मकसद "पूरे समुदाय पर आरोप लगाना या उन्हें दोषी ठहराना नहीं है, जिन्होंने लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से अपने वोट डाले हैं।"
केंद्रीय चुनाव समिति ने भी चिंताओं को कम करने की कोशिश की है। समिति के कार्यवाहक महानिदेशक डीन लिवने ने बड़े पैमाने पर चुनावी गड़बड़ी के दावों को "पूरी तरह से बेबुनियाद" बताया है।
आइज़ेनकोट ने नेतन्याहू पर साधा निशाना
आइज़ेनकोट ने नेतन्याहू पर चुनावी नतीजों की वैधता पर सवाल उठाने का अभियान चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष नई नेसेट के कामकाज में किसी भी तरह की रुकावट नहीं आने देगा।
विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों पर बात करते हुए, आइज़ेनकोट ने कहा कि उनकी पार्टी अनिवार्य सैन्य सेवा (यूनिवर्सल मिलिट्री कॉन्सक्रिप्शन) पर कानून लाने की तैयारी कर रही है। साथ ही, वे 7 अक्टूबर के नरसंहार की जांच के लिए एक 'स्टेट कमीशन ऑफ इंक्वायरी' (सरकारी जांच आयोग) गठित करने की भी योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि 10 नवंबर को नई नेसेट (संसद) के शपथ लेने के तुरंत बाद दोनों प्रस्ताव पेश किए जाएंगे। नेतान्याहू विरोधी पार्टियों ने 120 सदस्यों वाली संसद में कुल 67 सीटें हासिल की हैं, जिससे उन्हें नेसेट के कामकाज शुरू होने पर कानून लाने का मौका मिल सकता है।
इन प्रस्तावित कानूनों का नेतान्याहू ने कड़ा विरोध किया है। इससे संकेत मिलता है कि संसद के जटिल समीकरणों के बावजूद, आइसेनकोट प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली 'राष्ट्रीय एकता सरकार' में शामिल होने के सख्त खिलाफ हैं। नेतान्याहू की लिकुड पार्टी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है।
नेतान्याहू की लिकुड पार्टी ने अपने आरोप और तेज कर दिए हैं। उन्होंने 'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट में दावा किया है कि "इजरायल में चुनाव अरब पार्टियों द्वारा चुरा लिए गए थे।" पार्टी ने कहा कि उसने चुनाव में कथित धांधली के सबूत पुलिस, शिन बेट (इजरायली खुफिया एजेंसी) और केंद्रीय चुनाव समिति को सौंप दिए हैं। साथ ही, उन्होंने इस मामले की पूरी जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाने की मांग की है।
लिकुड ने अपने बयान में कहा, "हम पुलिस और शिन बेट से मांग करते हैं कि अरब पार्टियों द्वारा की गई 'चुनाव चोरी' की गहन जांच हो और दोषियों पर पूरी तरह से मुकदमा चलाया जाए।" पार्टी ने केंद्रीय चुनाव समिति से भी इन आरोपों पर तुरंत जवाब देने को कहा है। उन्होंने इन घटनाओं को इजरायल की चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और नागरिकों के मतदान के अधिकार के लिए एक गंभीर खतरा बताया है।
हालांकि, इन आरोपों का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, और चुनाव अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के दावों को खारिज कर दिया है।
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