Prajatantra: पश्चिम बंगाल को लेकर तेज हुई सिसायी लड़ाई, 'मुल्ला, मौलवी, मदरसा' पर आई

By अंकित सिंह | May 15, 2024

दक्षिण भारत के बाद वह पश्चिम बंगाल ही है जहां भाजपा को सबसे ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ को मजबूत कर चुकी हैं और उन्हें वहां मात देना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को कामयाबी तो मिली थी। लेकिन विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से पार्टी को मुंह की खानी पड़ी थी। पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें है जो की राष्ट्रीय राजनीति के लिए बेहद ही अहम है। लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा पश्चिम बंगाल से लगातार बड़ी उम्मीदें कर रही है। यही कारण है कि पार्टी की ओर से पश्चिम बंगाल में जबरदस्त तरीके से अपनी ताकत झोंकी जा रही है। पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में से 18 सीटों पर चुनाव हो चुके हैं। बाकी के बचे हुए चरणों में अन्य सीटों पर चुनाव होंगे। 

भाजपा पर ममता भी है हमलावर

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि मैं एनआरसी नहीं होने दूंगी... असम में 19 लाख हिंदू बंगालियों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं... अगर वे मुझसे मेरे माता-पिता का प्रमाण पत्र मांगते हैं, तो मुझे उनका जन्मदिन भी नहीं पता, मैं कहां से लाऊंगी प्रमाणपत्र। यदि वे आपसे 50 साल पहले का प्रमाण पत्र लाने के लिए कहते हैं, तो आपको पहले भाजपा उम्मीदवारों को सीएए के लिए आवेदन करने के लिए कहना चाहिए। आप आवेदन क्यों नहीं कर रहे हैं, क्योंकि आप विदेशी हो जाएंगे? ममता ने एक और बयान में कहा कि पहले वे कहते थे कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की अनुमति नहीं देती हैं। आप (जनता) हमें बताएं कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा होती है या नहीं। वे बहुत झूठ बोलते हैं। उनका कहना है कि हम सरस्वती पूजा की इजाजत नहीं देते। क्या आप (भाजपा) सरस्वती पूजा के मंत्र जानते हैं? क्या आप पश्चिम बंगाल की संस्कृति जानते हैं? आपके राज्यों में मांस की दुकानें बंद हैं और आप बंगाल आते हैं और पूछते हैं कि आप मछली क्यों खाते हैं?...यदि आप (भाजपा) ढोकला, डोसा खाना चाहते हैं - खायें। हमें कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन आप यह तय नहीं कर सकते कि हम क्या खा सकते हैं या क्या पढ़ सकते हैं। 

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राजनीतिक दांव-पेंच

वार-पलटवार और बयान बाजी से इतना तो आप समझ गए होंगे कि पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में मुस्लिम मतदाता बेहद ही अहम हैं। भाजपा पश्चिम बंगाल में ध्रुवीकरण की कोशिश में रहती है ताकि हिंदू वोटो को एकजुट किया जा सके। दूसरी ओर ममता बनर्जी की नजर मुस्लिम वोटो पर रहती है। मुस्लिम मतदाताओं की ही वजह से उनकी पार्टी राज्य में मजबूत हुई है। यही कारण है कि वह लगातार का सीएए और एनआरसी जैसी चीजों का विरोध करती रहती है। जबकि भाजपा राज्य में दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा को मुद्दा बनती है, राज्य की संस्कृति को मुद्दा बनती है और दावा करती है कि ममता बनर्जी ने वोट बैंक को बढ़ाने के लिए एक खास समुदाय को राज्य में मजबूती दी है। कुल मिलाकर देखें तप पश्चिम बंगाल राजनीतिक केंद्र में अक्सर इन्हीं वजह से चर्चा में भी रहता है। 

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