By अभिनय आकाश | Jan 20, 2026
भारत और यूएई के रिश्तों में अब एक और नया अध्याय जुड़ चुका है। जहां कल यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अलनहान प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर भारत पहुंचे थे। आपको बता दें हवाई अड्डे पर खुद प्रधानमंत्री मोदी उनका स्वागत करने पहुंचे थे। जिसके बाद दोनों ही नेताओं ने एक ही कार में सवार होकर प्रधानमंत्री आवास तक की यात्रा की। प्रधानमंत्री आवास पर पहुंचकर दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर आपस में बातचीत की और दोनों ही देशों के बीच कई अहम समझौतों पर सहमति भी बनी है। यूएई राष्ट्रपति का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण रहा। जहां भारत और यूएई ने रक्षा, व्यापार, यमन, गाजा, डिजिटल एंबेसी और निवेश जैसे कई अहम मुद्दों पर आपसी सहमति बनाई और समझौते किए।
यूराई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद नाहयान करीब 2 घंटे के दौरे पर दिल्ली पहुंचे, जहां पीएम नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई। एयरपोर्ट पर पीएम मोदी ने खुद उनका स्वागत किया और दोनों नेता - एक ही कार में पीएम आवास तक पहुंचे। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर पर बातचीत हुई। इस मुलाकात में दोनों देशों ने 2032 तक सालाना व्यापार को दोगुना करके 200 अरब डॉलर - तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया।
अभी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के है।
दोनों देशों ने 'डिजिटल एम्बेसी स्थापित करने पर सहमति जताई है। डिजिटाल एम्बेसी मतलब देश का जरूरी और संवेदनशील डेटा दूसरे देश में सुरक्षित सर्वर पर रखना, ताकि संकट या सइबर हमले में भी डेटा सुरक्षित रहे। भुगतान प्लेटफॉर्म जोड़ने, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम, भारतीय उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने और गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन में यूएई की भागीदारी जैसे 12 पाइंट पर सहमति बनी। इस यात्रा की एक और खास बात रही और वो थी दोनों देशों ने मिलकर पाकिस्तान को लपेटे में लिया है। दरअसल दोनों नेताओं ने दुनिया भर में चल रहे कुछ अहम मुद्दों पर अपने विचार भी साझा किए जिनमें पश्चिमी एशिया और वैश्विक हालात पर दोनों नेताओं के विचार थे। लेकिन सबसे अहम बात यह रही कि शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए दोनों देशों ने आपसी सहमति बनाई है। इसके लिए दोनों देशों ने सीमा पर आतंकवाद की कड़ी शब्दों में निंदा की और इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद करने वालों, उन्हें समर्थन देने वालों और आतंकवाद को फंड करने वालों को भी न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।
एचपीसीएल और यूएई के बीच 10 साल का एलएनजी (प्राकृतिक गैस) समझौता हुआ, जिसके तहत भारत को 2028 से लंबी अवधि की सप्लाई मिलेगी। डील के मुताबिक एचपीसीएल हर साल 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी खरीदेगा।
भारत और यूएई ने बड़े परमाणु रिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर पर मिलकर काम करने पर सहमति दी। दोनों देश इन रिएक्टरों के संचालन, देखरेख, नई तकनीक और परमाणु सुरक्षा में सहयोग बढ़ाएंगे
भारत में यूएई की साझेदारी से सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित किया जाएगा, जिससे हाई लेवल कंप्यूटिंग, रिसर्च और डेटा प्रोसेसिंग क्षमता को मजबूती मिलेगी।
एमबीजेड की यात्रा के सकारात्मक परिणामों के बावजूद, कई लोग अब भी यह जानने को उत्सुक हैं कि यूएई नेता की भारत की अचानक यात्रा का कारण क्या था। अगर गौर से देखा जाए, तो मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां ही सब कुछ स्पष्ट करती हैं। सबसे पहले, यह यमन को लेकर यूएई और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में हुआ है। पिछले साल दिसंबर के अंत में, यमन में पनप रहे तनाव तब खुलकर सामने आ गए जब सऊदी अधिकारियों ने यूएई पर यमन में अलगाववादी समूहों का समर्थन करने का आरोप लगाया और दक्षिणी यमन के मुकाला शहर में एक हवाई हमला किया, जिसमें यूएई से दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (एक ऐसा ही अलगाववादी समूह) को भेजे जा रहे हथियारों की कथित खेप को निशाना बनाया गया। यूएई ने पीछे हटते हुए कहा कि वह यमन से अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा।