By अंकित सिंह | Sep 29, 2022
सरकार ने बुधवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उससे जुड़े संगठनों पर 5 साल के लिए बैन लगा दिया है। इसके बाद से कई राज्यों में पीएफआई की ओर से अपने संगठन को भंग कर दिया गया है। हालांकि, सरकार के इस फैसले पर राजनीति भी जमकर हो रही है। कई विपक्षी दलों ने तो इसका स्वागत किया। लेकिन साथ ही साथ यह भी कह दिया कि आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद जैसे दक्षिणपंथी संगठन पर भी सरकार को प्रतिबंध लगाना चाहिए। इसी के जवाब में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी का भी बयान सामने आया है। विपक्ष की इस सम्मान पर प्रल्हाद जोशी ने साफ तौर पर कहा है कि यह बचकानी बातें हैं। उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति के लिए ऐसा कहा जा रहा है।
बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पीएफआई को आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित हुए 32 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन नीतीश कुमार की पुलिस ने अभी तक राज्य में पीएफआई पर कोई कार्रवाई नहीं की है। पीएम का सपना देखने वाले नीतीश जी को बताना होगा कि क्या वह पीएफआई के एजेंडा "2047 तक भारत का इस्लामीकरण" का समर्थन करते हैं? इससे पहले सुशील कुमार मोदी ने आतंकी गतिविधियों में लिप्त पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ) पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार के साहसिक फैसले का स्वागत किया और महागठबंधन सरकार को चुनौती दी कि यदि हिम्मत है, तो वह आरएसएस पर प्रतिबंध लगाये।