Japan Para Badminton: Pramod Bhagat ने जीता गोल्ड, Sukant Kadam के 100 पदक पूरे

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 13, 2026

तोक्यो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता प्रमोद भगत ने रविवार को यहां जापान पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के पुरुष एकल एसएल3 में स्वर्ण और पुरुष युगल एसएल3-एसयू5 में रजत पदक जीता जबकि सुकांत कदम ने अपने करियर का 100वां पदक हासिल किया। छह बार के विश्व चैंपियन प्रमोद ने पुरुष एकल एसएल3 के फाइनल में साथी भारतीय यू कुमार को 30 मिनट में 21-16, 21-8 से हराकर शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने पुरुष युगल एसएल3-एसयू5 के फाइनल में कदम के साथ जोड़ी बनाई।

’’ उन्होंने कहा, ‘‘एक बार जब मैंने लय हासिल कर ली, तो मैं मुकाबले पर नियंत्रण बनाने में सफल रहा। युगल का नतीजा हमारी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन जिस तरह हमने संघर्ष किया, उस पर मुझे गर्व है। हर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट सीखने और सुधार करने का मौका होता है और मैं जापान से मिली सकारात्मक चीजों को आगे ले जाऊंगा।

’’ भारत ने विभिन्न वर्गों में कई अन्य पदक भी हासिल किए। चिराग बरेठा और सिंगापुर के वेई मिंग टे ने पुरुष युगल एसयू5 में स्वर्ण पदक जीता। शशांक कुमार ने दो कांस्य पदक जीते।

उन्होंने पुरुष एकल डब्ल्यूएच1 में तीसरा स्थान हासिल किया और अम्मू मोहन के साथ मिश्रित युगल डब्ल्यूएच1-डब्ल्यूएच2 में भी कांस्य पदक जीता। दीप रंजन बिसोई और कुलदीप महकुल ने भी पुरुष युगल एसएल3-एसयू5 में कांस्य पदक जीता जबकि तकर बीरी और हर्षित चौधरी इसी वर्ग में तीसरे स्थान पर रहे। अभिजीत सखुजा ने पुरुष एकल एसएल4 में एक और कांस्य पदक अपने नाम किया।

कदम के लिए यह टूर्नामेंट खास रहा क्योंकि 12 वर्षों के प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन करियर में उनके कुल पदकों की संख्या 100 हो गई। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ उन्होंने पुरुष युगल में रजत पदक और पुरुष एकल एसएल4 में भी रजत पदक हासिल किया। पुरुष एकल एसएल4 के फाइनल में कदम को फ्रांस के लुकास माजूर के हाथों 8-21, 16-21 से हार का सामना करना पड़ा।

कदम ने कहा, ‘‘करियर के 100 पदक पूरे करना मेरे लिए बेहद खास पल है। जब मैंने 12 साल पहले पैरा बैडमिंटन खेलना शुरू किया था, तब मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस मुकाम तक पहुंच पाऊंगा। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस सफर में कई उतार-चढ़ाव, जीत और हार आई हैं, लेकिन हर मुकाबले ने मुझे कुछ न कुछ सिखाया है।

इस पूरी यात्रा में मेरा समर्थन करने वाले सभी लोगों का मैं आभारी हूं। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही, मैं 100 पदकों को अपनी मंजिल नहीं मानना चाहता। यह उपलब्धि मुझे और कड़ी मेहनत करने तथा भारत के लिए कई और उपलब्धियां हासिल करने का लक्ष्य रखने के लिए प्रेरित करती है।

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