By एकता | Jul 05, 2026
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव ने राज्य के सियासी पारे को बढ़ा दिया है। जन सुराज पार्टी की ओर से खुद को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद प्रशांत किशोर ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। चुनावी मैदान में उतरते ही उन्होंने विपक्षी महागठबंधन (आरजेडी और कांग्रेस) के सामने दोस्ती का हाथ बढ़ाया है।
बांकीपुर सीट से अपनी उम्मीदवारी तय होने के बाद प्रशांत किशोर काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों से जन सुराज ही उनकी जिंदगी, उनका घर और एकमात्र मिशन रहा है। पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, वे उसे पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। पीके ने दावा किया कि यदि बांकीपुर की जनता का आशीर्वाद उन्हें मिला, तो वे यह चुनाव जरूर जीतेंगे। इससे उनकी पार्टी का हौसला बढ़ेगा और बिहार में बदलाव की शुरुआत होगी।
बांकीपुर सीट को पारंपरिक रूप से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। इस गढ़ को भेदने के लिए प्रशांत किशोर ने विरोधियों से ही समर्थन मांग लिया है। पीके चाहते हैं कि महागठबंधन अपने पारंपरिक वोट बैंक के समीकरणों से ऊपर उठकर, बीजेपी को हराने के लिए उन्हें एक मजबूत विकल्प के रूप में समर्थन दे। उन्होंने मतदाताओं से वादा किया कि अगर वे जीतकर विधानसभा पहुंचते हैं, तो बिना किसी डर के सिर्फ जनता की आवाज उठाएंगे। उन्होंने अपील की कि लोग पार्टी लाइन से अलग हटकर सिर्फ काम करने वाले चेहरे को वोट दें।
प्रशांत किशोर ने राज्य की मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह उपचुनाव सरकार के कामकाज का लिटमस टेस्ट है। जनता सरकार की नीतियों और फैसलों से कितनी खुश है, इसका फैसला बांकीपुर के चुनावी नतीजों से पूरी तरह साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इस परीक्षा में सरकार को पास करती है या फेल।
पीके ने साफ किया कि बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों से रातों-रात बिहार की मौजूदा सरकार नहीं गिर जाएगी, लेकिन इस एक सीट का परिणाम बिहार की भविष्य की राजनीति को एक नई और सकारात्मक दिशा जरूर दे सकता है। उन्होंने जागरूक मतदाताओं से अपील की कि वे इस बड़े मौके को हाथ से न जाने दें और काम करने वाले सही उम्मीदवार को चुनकर राज्य में बदलाव की नई हवा चलाएं।