Prateek Yadav ने तलाक के ऐलान के बाद लिया यू टर्न, पत्नी Aparna Yadav के साथ फोटो पोस्ट कर कहा- हम साथ साथ हैं

By नीरज कुमार दुबे | Jan 30, 2026

समाजवादी परिवार के सदस्य और मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव ने बीते कुछ दिनों में जो कुछ कहा और किया, उसने राजनीति से ज्यादा निजी जीवन को सार्वजनिक तमाशा बना दिया। कुछ ही दिन पहले पत्नी अपर्णा यादव से तलाक की घोषणा कर उन्होंने सनसनी फैला दी थी। उस घोषणा में उन्होंने अपर्णा पर परिवार तोड़ने, स्वार्थी होने और केवल नाम व शोहरत के पीछे भागने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने अपनी मानसिक हालत खराब होने की बात कहते हुए यह तक लिख दिया था कि पत्नी को इसकी कोई परवाह नहीं। यह बयान न केवल कठोर था बल्कि बेहद व्यक्तिगत भी था।

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इतना ही नहीं, उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया जिसमें वह आलोचना करने वालों पर भड़के नजर आये। उन्होंने साफ कहा कि 19 जनवरी को उनके और उनकी पत्नी के बीच गंभीर विवाद हुआ था, जिसके बाद उन्होंने पोस्ट डाले, लेकिन अब दोनों ने मिलकर मामला सुलझा लिया है। जो लोग इससे परेशान हैं या जिनके पेट में दर्द हो रहा है, उनके लिए उनका संदेश बेहद कड़ा और अपमानजनक था। इसके बाद एक और संदेश में प्रतीक यादव ने यह भी कहा कि उन्हें कुछ लोगों के दिलों में भरी नफरत देखकर दुख होता है और यह नकारात्मकता उनके मानसिक कष्ट को ही दिखाती है।

हम आपको बता दें कि प्रतीक यादव मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना यादव के पुत्र हैं। उनकी और अपर्णा यादव की सगाई 2011 में हुई थी और 2012 में विवाह हुआ था। विवाह समारोह में देश की कई जानी मानी हस्तियां मौजूद थीं। दोनों शादी से पहले दस साल तक रिश्ते में रहे और स्कूल के दिनों से एक दूसरे को जानते थे। देखा जाये तो जब प्रभावशाली परिवारों से जुड़े लोग अपने निजी झगड़े को खुले मंच पर लाते हैं, तो उसका असर केवल उनके घर तक सीमित नहीं रहता। तलाक जैसी गंभीर घोषणा को भावनात्मक आवेग में सार्वजनिक करना और फिर कुछ ही दिनों में यू टर्न लेना, यह बताता है कि आत्मसंयम और समझदारी कितनी कमजोर हो चली है।

प्रतीक यादव का गुस्से भरा पलटवार और आलोचकों के लिए अपमानजनक भाषा भी यह सवाल उठाती है कि क्या सार्वजनिक संवाद में मर्यादा अब बेमानी हो चुकी है। एक तरफ सुलह की बात, दूसरी तरफ आक्रामक शब्दों की बौछार, यह दोहरा चरित्र भरोसे को कमजोर करता है। अगर मामला सुलझ गया है, तो शालीनता और चुप्पी भी एक मजबूत संदेश हो सकती थी। निजी दुख दर्द को हथियार बनाकर सहानुभूति बटोरना और फिर उसी मंच से विरोधियों पर हमला करना, यह प्रवृत्ति खतरनाक है।

इस पूरे घटनाक्रम से एक सबक साफ निकलता है। निजी रिश्तों की मर्यादा को सार्वजनिक तमाशा न बनने दिया जाए। भावनाओं में लिये गये फैसले बाद में खुद ही बोझ बन जाते हैं। अगर सुलह हुई है तो उसे शांति से जीने दिया जाए और अगर विवाद है तो उसे गरिमा के साथ सुलझाया जाए। वरना ऐसे यू टर्न केवल व्यक्ति की नहीं, पूरे सार्वजनिक जीवन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।

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