By Ankit Jaiswal | Sep 20, 2026
त्योहारी मौसम शुरू होते ही घड़ी कारोबार में मांग बढ़ने लगी है और इसी बीच टाइटन कंपनी ने अपने प्रीमियम और महंगी घड़ियों के कारोबार को और बड़ा करने के संकेत दिए हैं। कंपनी छोटी और तेजी से उभर रही घड़ी कंपनियों में निवेश करने या उन्हें खरीदने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। टाटा समूह की इस कंपनी का कहना है कि कोई भी सौदा उसकी लंबे समय की कारोबारी योजना से जुड़ा और उपयोगी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि त्योहारी मौसम की शुरुआत कंपनी के लिए अच्छी रही है और मांग को देखते हुए उत्पादन तथा आपूर्ति क्षमता को लेकर दबाव महसूस हो रहा है। कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में घड़ियों की बिक्री और मजबूत हो सकती है।
बता दें कि टाइटन अपनी विस्तार योजना में केवल खुद से कारोबार बढ़ाने पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी जरूरत के मुताबिक दूसरी कंपनियों में निवेश या अधिग्रहण के रास्ते को भी खुला रखना चाहती है। रंजनी कृष्णास्वामी के मुताबिक, छोटी घड़ी कंपनियों में निवेश या उन्हें खरीदना टाइटन के लिए भविष्य में एक विकल्प हो सकता है, बशर्ते वह कंपनी की मौजूदा गतिविधियों को मजबूत करने में मदद करे।
उन्होंने टाइटन के आभूषण कारोबार का उदाहरण भी दिया। कंपनी पहले कारटलेन जैसी कंपनियों में निवेश और अधिग्रहण के जरिए अपने कारोबार का विस्तार कर चुकी है। इसी अनुभव को घड़ी कारोबार में भी इस्तेमाल करने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। हालांकि टाइटन किसी कंपनी को केवल बाजार में मौजूद अवसर देखकर खरीदने के बजाय ऐसी साझेदारी चाहती है जो उसके बड़े कारोबारी लक्ष्य के साथ मेल खाए।
मौजूद जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय में भारत में छोटी और स्थानीय सोच के साथ घड़ियां बनाने वाले कई नए ब्रांड सामने आए हैं। इनमें भारतीय डिजाइन, संस्कृति और स्थानीय पसंद को ध्यान में रखकर उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। खासकर युवा और अधिक खर्च करने वाले ग्राहक ऐसे ब्रांडों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
टाइटन इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा को अपने लिए खतरे के तौर पर नहीं देख रही है। रंजनी कृष्णास्वामी का मानना है कि किसी भी बड़े बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ना उस क्षेत्र के लिए फायदेमंद होता है। इससे पुराने और बड़े खिलाड़ियों पर भी नए उत्पाद लाने, बेहतर डिजाइन तैयार करने और ग्राहकों की बदलती पसंद के हिसाब से खुद को बदलने का दबाव रहता है।
गौरतलब है कि टाइटन ने हाल ही में वेत्रा नाम का अपना घड़ी निर्माण मंच पेश किया है। कंपनी के मुताबिक, इसका नाम वेद और यंत्र से जुड़े शब्दों से बनाया गया है। इस पहल का मकसद भारतीय घड़ी निर्माण को उच्च स्तर तक ले जाना और महंगी तथा खास घड़ियों के वैश्विक बाजार में अपनी जगह मजबूत करना है।
रंजनी कृष्णास्वामी ने कहा कि टाइटन दुनिया के घड़ी बाजार में तीसरी बड़ी ताकत बनने का सपना देख रही है। उनका इशारा स्विस और जापानी घड़ी उद्योग के बाद भारतीय घड़ी निर्माण को एक अलग पहचान दिलाने की दिशा में है।
कंपनी के अनुसार, प्रीमियम घड़ियों की मांग इस समय तेज है और यह श्रेणी 25 हजार रुपये से कम कीमत वाली घड़ियों की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ रही है। दूसरी तरफ एक हजार रुपये से कम कीमत वाली सामान्य घड़ियों की मांग में सुस्ती देखी जा रही है। इसकी एक वजह यह भी है कि घड़ी अब केवल समय देखने का साधन नहीं, बल्कि लोगों की व्यक्तिगत पसंद और पहनावे का हिस्सा बनती जा रही है।
टाइटन भारत में हेलिओस के जरिए टॉमी हिलफिगर, केनेथ कोल, पुलिस, सेरुटी और रोमर जैसे विदेशी ब्रांड भी बेचती है। कंपनी आगे कुछ और सस्ती स्विस घड़ी कंपनियों को भारतीय बाजार में लाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। व्यापार समझौतों से आयात लागत कम होने पर इस दिशा में नए अवसर बन सकते हैं।