भारत को 'सर्विस कंज्यूमर' से 'सर्विस प्रोवाइडर' में बदल सकती हैं भारतीय भाषाएं: प्रो. संजय द्विवेदी

By प्रेस विज्ञप्ति | Sep 16, 2021

नई दिल्ली। ''अगर हम भारतीय भाषाओं के संख्या बल को सेवा प्राप्तकर्ता से सेवा प्रदाता में तब्दील कर दें, तो भारत जितनी बड़ी तकनीकी शक्ति आज है, उससे कई गुना बड़ी शक्ति बन सकता है।'' यह विचार भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने केट्स वी.जी. वझे महाविद्यालय, हिंदी साहित्य परिषद एवं हिंदी विभाग द्वारा आयोजित 'हिंदी दिवस समारोह' के अवसर पर व्यक्त किए। 

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि हमें भारत को सिर्फ बीपीओ और आउटसोर्सिंग के जरिए तकनीकी विश्व शक्ति नहीं बनाना है, बल्कि उसे एक ज्ञान समाज में बदलना है। तकनीक, भारत में सामाजिक परिवर्तनों तथा आर्थिक विकास का निरंतर चलने वाला जरिया बन सकती है, और भाषाओं की इसमें बड़ी भूमिका होने वाली है। प्रो. द्विवेदी के अनुसार आने वाला समय हिंदी का है। आज के समय में न तो हिंदी की सामग्री की कमी है और न ही पाठकों की। हिंदी का एक मजबूत पक्ष यह है कि यह अर्थव्यवस्था की भाषा बन चुकी है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी उपयोगिता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।

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कार्यक्रम में हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना दुबे, महाविद्याल के प्राचार्य डॉ. बी.बी. शर्मा, डॉ. प्रीता नीलेश, सी.ए. विद्याधर जोशी, श्रीमती माधुरी बाजपेयी, जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. श्याम चौटानी, श्री अजित राऊत, श्री भरत भेरे एवं श्री गोपीनाथ जाधव के साथ महाविद्यालय के अन्य शिक्षक भी शामिल हुए।

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