By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 11, 2023
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को परियोजनाओं के सही मायने में पर्यावरणीय प्रभाव को प्रतिबिंबित करने वाली उचित ‘हरित रेटिंग’ की जरूरत बतायी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि विकासशील देशों को हरित परियोजनाओं के लिये पर्याप्त कोष मिले। वित्त मंत्रालय और आरबीआई की तरफ से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर आयोजित जी-20 सेमिनार को संबोधित करते हुए दास ने कहा कि वैश्विक वृद्धि के लिये प्रमुख जोखिम जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ मुद्रास्फीति, वित्तीय स्थिरता और भू-राजनीतिक दबाव है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा ध्यान हरित (ऊर्जा) बदलाव के लिये पर्याप्त और सस्ता वित्तपोषण की उपलब्धता के जरिये जलवायु परिवर्तन जैसी दीर्घकालिक संरचनात्मक चुनौतियों पर होना चाहिए।
दास ने आर्थिक गतिविधियों और वृद्धि संभावनाओं को नुकसान पहुंचाये बिना व्यवस्थित रूप से हरित बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि यह और भी अधिक आवश्यक है क्योंकि हरित परियोजनाओं के लिए वास्तविक वित्तीय प्रवाह अत्यधिक विषम है और काफी हद तक विकसित अर्थव्यवस्थाओं में केंद्रित है। दास ने कहा, ‘इसीलिए, उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में हरित पूंजी प्रवाह को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।