प्रकृति के तत्वों की रक्षा (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | May 23, 2022

विकास प्रिय शासक समाज को प्रकृति के पांच तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका याद दिलाते हैं, जनता सुनकर बहुत खुश होती है और वाह वाह करती है। जनता के छोटे नायक और नायिकाएं इस बात से अति प्रसन्न होते हैं कि उनको भी जीवन में पहली बार  पांच तत्वों बारे ज्ञान प्राप्त हुआ। वैसे अनजाने में वे खुद इन तत्वों को नुक्सान पहुंचा रहे थे। कभी कभार एक दूसरे को कह भी देते थे कि ध्यान रखो मगर ध्यान नहीं रहता था। जीवन संघर्ष के दूसरे तत्वों ने उन्हें यह तत्व भुलाने में खूब मदद की थी। शासक ने निरंतर शासन में रहने के लिए प्रकृति प्रेम का खूब इज़हार किया जो सभी को खूब अच्छा लगा। प्रकृति प्रेम, बहुत स्वाद वस्तु होती है कोई उसके मोहपाश से कोई बच नहीं सकता। कुदरत के विकास बारे राजनीतिक आश्वासन मिल जाए इससे बेहतर क्या हो सकता है। पांच तत्व मुस्कुराने लगे हैं उन्हें लग रहा है अच्छे दिन आए समझो।

कुछ दिन के भीतर अखबारों में शासक का ब्यान छपा। जिसमें उनकी नई फोटो प्रयोग हुई थी, वे मुस्कुरा रहे थे, माथे पर तिलक सजा था। इस चित्र के माध्यम से उनकी बेहद सौम्य, शालीन, सरल, आध्यात्मिक व धार्मिक छवि बन रही थी। खबर सूचित कर रही थी कि प्रबुद्ध शासकों के आह्वान पर प्रशासन ने प्रकृति के पांच तत्वों को जीवन का आवश्यक तत्व माना है। गहन मंथन के बाद संदर्भित योजना कार्यान्वित की जा रही है ताकि आम लोग प्रकृति से ज़्यादा प्यार करना शुरू करें। उन्हें प्रकृति के तत्वों के महत्त्व का ज्ञान हो। प्रकृति के यह महत्त्वपूर्ण हिस्से हमारी बाल व युवा पीढ़ियों की आँखों के सामने रहें ताकि प्रकृति प्रेम परवान चढ़ता रहे।

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शासकों की योजना के अनुसार जगह जगह शीघ्र ही इन पांच तत्वों को मूर्त रूप में स्थापित किया जाएगा। आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी की आकर्षक, सुन्दर, टिकाऊ मूर्तियां लगाईं जाएंगी। देश के प्रसिद्ध कलाकार, प्रारूपकार व कल्पना विशेषज्ञ इन मूर्तियों की सामग्री, रंग, आकार, बनावट बारे सुनिश्चित करेंगे ताकि पांच तत्वों के प्राकृतिक सम्प्रेषण में कोई कमी न रहे। स्वाभाविक है इन मूर्तियों का आकार विशाल ही होगा जिसकी एक झलक से ही आम आदमी को इनकी महत्ता की अनुभूति होने लगेगी। इस महान योजना बारे जिसने भी सुना धन्य होता गया वह बात अलग है कि कुछ प्रकृति प्रेमी नाराज़ हो गए जिससे किसी को कुछ फर्क नहीं पढ़ना था।

- संतोष उत्सुक

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