DA केस में High Court ने Punjab Chief Secretary को भेजा अवमानना नोटिस

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 06, 2026

चंडीगढ़, छह अक्टूबर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पंजाब के मुख्य सचिव के. ए. पी. सिन्हा को नोटिस जारी कर पूछा कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) से जुड़े एक मामले में प्रथम दृष्टया झूठा बयान देने के लिए क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की जाए। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने मुख्य सचिव को सुनवाई की अगली तारीख (शुक्रवार) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया। यह कदम उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री से पंजाब सरकार की अपील की स्थिति के संबंध में उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को मिली एक रिपोर्ट के बाद उठाया गया है।

अदालत ने सोमवार को अपनी रजिस्ट्री को उच्चतम न्यायालय से राज्य सरकार की अपील की स्थिति के संबंध में तुरंत रिपोर्ट प्राप्त करने का निर्देश दिया था। अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जो उसके तीन अगस्त के उस आदेश का पालन न करने से जुड़ी थीं, जिसमें राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उसी दर पर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत बकाया जारी करने का निर्देश दिया गया था, जो दरें केंद्र सरकार की पद्धति पर राज्य में कार्यरत अखिल भारतीय सेवाओं के (आईएएस/आईपीएस/आईएफएस) अधिकारियों को दी जाती हैं। पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ एक सितंबर को शीर्ष अदालत में एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी, जिसमें दलील दी गयी थी कि इतनी कम अवधि में लगभग 14,191 करोड़ रुपये का कुल बकाया भुगतान करने का निर्देश संवैधानिक रूप से असंभव था।

पीठ ने सोमवार को अदालत के साथ आंख-मिचौली खेलने के लिए पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने सरकार के उस दावे पर सवाल उठाया था, जिसमें कहा गया था कि शीर्ष न्यायालय के समक्ष उसकी अपील की त्रुटियों को दूर कर लिया गया है। अदालत ने सोमवार को टिप्पणी की थी, ‘‘हम यह समझने में पूरी तरह असमर्थ हैं कि पंजाब सरकार अदालत के साथ आंख-मिचौली खेलकर वास्तव में क्या हासिल करना चाहती है।

यदि शीर्ष अदालत के समक्ष एक सितंबर को ही अपील दायर कर दी गई थी, तो इस पर अब तक सुनवाई करवाई जा सकती थी। ऐसा प्रतीत होता है कि यह प्रयास केवल शीर्ष अदालत के समक्ष कानूनी उपाय तलाशने की आड़ में समय काटने के लिए किया जा रहा है।’’ राज्य सरकार के वकील ने सोमवार को जोर देकर कहा था कि त्रुटियों को दूर कर लिया गया है और शीर्ष अदालत के समक्ष अपील बिल्कुल दुरुस्त है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने वकील के इस बयान का पुरजोर खंडन किया।

याचिकाकर्ताओं ने तीन अगस्त के आदेश का पालन न करने के लिए राज्य सरकार के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय ने, हालांकि 10 सितंबर को हुई पिछली सुनवाई के दौरान इस बात का संज्ञान लिया था कि राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर दी थी, लेकिन उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर नहीं किया गया था।

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