By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 23, 2026
पंजाब विधानसभा में शुक्रवार को उस समय हंगामा हो गया, जब कांग्रेस विधायकों ने मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की। पंजाब विधानसभा के दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने झोटा की हत्या का मुद्दा सदन में उठाया। विधानसभा अध्यक्ष ने बाजवा से प्रश्नकाल शुरू होने देने को कहा, जिसके बाद विपक्ष के नेता और अन्य विपक्षी विधायक अपनी सीटों से खड़े हो गए और आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
इसके जवाब में सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी कांग्रेस पर पलटवार किया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस को निशाने पर लिया। चीमा ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह के शिरोमणि अकाली दल के साथ पुराने जुड़ाव की भी आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में अकाली दल के शासन के दौरान ही ‘चिट्टा’ (मिलावटी हेरोइन) का प्रसार हुआ था। कांग्रेस सदस्यों का विरोध जारी रहने पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की। एक समय वित्त मंत्री चीमा और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा एक-दूसरे की ओर उंगली उठाते हुए दिखाई दिए।
जालंधर कैंट से विधायक और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने सत्ता पक्ष से ‘लानत पत्र’ स्वीकार करने को कहा। शोर-शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में व्यवस्था बनाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी कोशिश सफल होती हुई नहीं दिखी। बाद में कांग्रेस विधायकों ने सदन से बहिर्गमन किया।
नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर झोटा मादक द्रव्यों के दुरुपयोग और दवा की दुकानों पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में स्थित एक दवा की दुकान के अंदर दिनदहाड़े उन्हें गोली मार दी गई थी। दवा की दुकान के मालिक अश्वनी कुमार ने कथित तौर पर एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीली दवाएं बेचने पर झोटा द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद उन पर गोली चलाई थी।
उसे राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया गया। झोटा फेसबुक लाइव कर रहे थे, तभी यह घटना हुई। इससे पंजाब में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
राज्य में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।