By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 11, 2021
नयी दिल्ली। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनसे विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि उन्होंने किसानों को मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने वालों की श्रेणी में शामिल करने के लिए संबंधित कानून में संशोधन की भी मांग की। आज देर शाम हुई मुलाकात में पंजाब के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को दो अलग-अलग पत्र सौंपे। इनमेंपंजाब और अन्य राज्यों के किसानों मेंआक्रोश पैदा करने वाले तीन कृषि कानूनों की तत्काल समीक्षा और उन्हें रद्द करने का आह्वान किया गया है। किसान पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
एक अन्य पत्र में, मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भूमि के विखंडन, पट्टेदारों व विभिन्न बाजार संचालकों और एजेंटों के साथ लगातार विवादों के कारण, किसानों को इन दिनों मुकदमेबाजी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके अल्प वित्तीय संसाधनों पर दबाव पड़ रहा है। उन्होंने इस तरह के मुकदमों के परिणामस्वरूप किसानों पर पड़ेवित्तीय बोझ को कम करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि केंद्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 कुछ श्रेणियों के व्यक्तियों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करता है, जिन्हें समाज का कमजोर वर्ग माना जाता है। सिंह ने कहा कि देश के किसान भी बहुत कमजोर हैं और वे कभी-कभी वित्तीय समस्याओं के कारण आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। सिंह ने कहा, इस प्रकार, कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 में संशोधन करना समय की आवश्यकता है, ताकि किसानों और कृषि श्रमिकों को उन व्यक्तियों की श्रेणी में शामिल किया जा सके, जो अदालतों में अपना बचाव करने के लिए मुफ्त कानूनी सेवाओं के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि इस कदम से किसानों की आत्महत्या के मामलों को कम करने और उनके कानूनी और वित्तीय अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से किसानों के व्यापक हित में कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 में आवश्यक संशोधन करने के लिए किसान कल्याण और कानूनों से संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों को सलाह देने का आग्रह किया।