By अनुराग गुप्ता | Feb 10, 2022
जालंधर। पंजाब की 117 सीटों पर होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए 10 दिन से भी कम का समय बचा हुआ है। ऐसे में तमाम राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। लेकिन एक ऐसा नाम है जो कमजोर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। हमेशा ही फ्रंट फुट पर बैंटिंग करने वाले नवजोत सिंह सिद्धू अपने चुनावी क्षेत्र अमृतसर ईस्ट तक ही सीमित हो गए हैं। दरअसल, क्रिकेट हो या फिर राजनीति हमेशा ही सिद्धू को फ्रंट फुट पर खेलते हुए देखा गया है लेकिन मुख्यमंत्री चेहरे की रेस में पिछड़ने के बाद उन्होंने अपने आपको अमृतसर ईस्ट तक ही सीमित कर लिया है।
क्या है इसके पीछे की वजह ?
मजीठा छोड़ शिरोमणि अकाली दल (शिअद) नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए नामांकन दाखिल किया है। इस बार अमृतसर ईस्ट में सिद्धू बनाम मजीठिया के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा। ऐसे में सिद्धू अपनी कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। लंबे-लंबे शार्ट खेलने वाले सिद्धू का सियासत की इस पारी को बड़े अंतर से जीतना चाहते हैं। जबकि मजीठिया ने सिद्धू को मात देने की ठान रखी है।
मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सिद्धू आश्वस्त थे कि कांग्रेस उन्हें ही अपना नेता चुनेगी लेकिन राहुल गांधी के ऐलान से वो अचरज में पड़ गया। हालांकि उन्होंने मंच में मौजूद चरणजीत सिंह चन्नी का मजबूती से हाथ थामकर खुशी जाहिर की। लेकिन अंदर-ही-अंदर सिद्धू काफी दुखी हैं। क्योंकि उन्होंने ऐलान से पहले कहा था कि पंजाब में जो भी चेहरा होगा, वहीं जवाबदेह होगा।
चन्नी और सिद्धू दोनों ने ही आलाकमान पर मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के लिए दबाव बनाया था। जिसके बाद पार्टी ने एक सर्वे कराया और फिर चन्नी के नाम का ऐलान कर दिया। जिसके बाद सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर हमलावर दिखाई दीं। उन्होंने चन्नी की गरीब पृष्ठभूमि की छवि को लेकर कहा था कि राहुल को चन्नी को गरीब समझने के लिए गुमराह किया गया है।
कौर ने कहा था कि इस तथ्य से परे कि क्रिकेटर से राजनीति में आए सिद्धू उनके पति हैं, वह छह महीने में ही पंजाब में बदलाव लाने के लिए बेहतर विकल्प होते। उन्होंने कहा था कि मेरा मानना है कि आपकी विशेषता, आपकी योग्यता, आपकी शिक्षा, आपका कार्य, आपकी ईमानदारी, वे बिंदु हैं जिनपर विचार किया जाना चाहिए।योग्यता देखनी चाहिए, अन्यथा राज्य कभी समृद्ध नहीं होगा।