By नीरज कुमार दुबे | Jan 30, 2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भीषण ठंड के कारण यूक्रेन की राजधानी कीव और देश के अन्य शहरों पर एक सप्ताह तक हमले नहीं करने पर सहमति जताई है। ट्रम्प ने यह बात वाशिंगटन में मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान कही। ट्रंप के अनुसार उन्होंने स्वयं पुतिन से बात कर कीव और आसपास के शहरों पर गोलीबारी और मिसाइल हमले रोकने का अनुरोध किया और पुतिन ने इसे स्वीकार कर लिया। ट्रम्प ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह अस्थायी विराम कब से लागू होगा।
हालांकि रूस की ओर से इस कथित सहमति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस घोषणा का स्वागत किया है। जेलेंस्की ने इसे अत्यधिक ठंड के दौर में यूक्रेनी शहरों और विशेषकर ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
इसी बीच, यूक्रेन के चार सीमावर्ती क्षेत्रों में हवाई हमले की चेतावनी सायरन बजे। ये वे इलाके हैं जो सीधे मोर्चे के निकट हैं। यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार इन क्षेत्रों में रूस ने 80 ड्रोन और एक बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। अधिकांश ड्रोन को मार गिराने का दावा किया गया है।
हम आपको बता दें कि यूक्रेन की राजधानी कीव में तापमान तेजी से गिरने लगा है और आने वाले दिनों में यह शून्य से चौबीस डिग्री सेल्सियस तक नीचे जा सकता है। पिछले कई सप्ताह से रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले तेज कर दिए हैं। 2022 में पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू होने के बाद से हर ठंडे दौर में रूस इसी रणनीति पर चलता रहा है। बिजलीघर, ट्रांसमिशन लाइन और ताप संयंत्र लगातार निशाने पर रहे हैं।
यूक्रेन के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार कीव सहित कई बड़े शहरों में बिजली आपूर्ति बुरी तरह बाधित है। ओडेसा, खारकीव और दोनेत्स्क जैसे क्षेत्रों में भी लंबे समय तक अंधेरा छाया रहता है। मरम्मत दल चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं लेकिन रूसी हवाई हमले उनकी मेहनत को पल भर में बेकार कर देते हैं। कई जगह बिजली कुछ घंटों के लिए आती है जिससे लोग केवल उपकरण चार्ज कर पाते हैं, घर गर्म करना लगभग असंभव बना हुआ है।
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि ट्रम्प का बयान इस बात की संभावना खोलता है कि अत्यधिक सर्दी के दौरान कीव और अन्य शहरों को अस्थायी सुरक्षा मिल सके। उन्होंने बताया कि इस विषय पर अमेरिकी, रूसी और यूक्रेनी दलों के बीच हाल ही में यूएई में त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी। बताया जा रहा है कि यूक्रेन ने भी जवाबी कदम के रूप में रूसी तेल शोधन संयंत्रों पर हमले रोकने पर सहमति दी है ताकि दोनों पक्ष एक दूसरे की कार्रवाई का अनुसरण करें।
हम आपको बता दें कि पिछले सप्ताह यूएई में हुई बैठक युद्ध शुरू होने के बाद पहली औपचारिक त्रिपक्षीय बातचीत थी। तीनों पक्षों ने इसे रचनात्मक बताया लेकिन अत्यधिक ठंड की पूरी अवधि के लिए हमले रोकने की कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं हुई।
देखा जाये तो भीषण ठंड को कारण बताकर हमले रोकने की बात दरअसल युद्ध के नए चरण की भूमिका भी हो सकती है। बिना रूसी पुष्टि के यह घोषणा कूटनीतिक दबाव बनाने की एक चाल मानी जा सकती है क्योंकि रूस की युद्ध नीति है ठंड को हथियार बनाओ। ऊर्जा ढांचे पर प्रहार कर नागरिक जीवन को ठप करो ताकि राजनीतिक दबाव भीतर से पैदा हो। ऐसे में यदि वास्तव में हमले रुकते हैं तो यह यूक्रेन के लिए जीवन रेखा साबित हो सकता है। बिजली और ताप की बहाली केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन का आधार है। ठंड में अंधेरा और बिना ताप के घर नागरिकों की सहनशक्ति तोड़ देते हैं।
सामरिक दृष्टि से यह विराम दोनों पक्षों को पुनर्संयोजन का अवसर देता है। रूस अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता को फिर से जमाने का समय पा सकता है जबकि यूक्रेन पश्चिमी सहायता के सहारे अपने वायु रक्षा तंत्र को मजबूत कर सकता है। यह भी स्पष्ट है कि मोर्चे के निकट क्षेत्रों में हमले पूरी तरह रुके नहीं हैं। यानी विराम चयनित और नियंत्रित है।
अमेरिका की भूमिका यहां निर्णायक दिखती है। ट्रम्प इसे व्यक्तिगत कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश कर रहे हैं। यह संदेश भी दिया जा रहा है कि वाशिंगटन चाहे तो युद्ध की तीव्रता को प्रभावित कर सकता है। इससे रूस पर नैतिक दबाव बनता है और वैश्विक मंच पर अमेरिका की मध्यस्थ छवि उभरती है। लेकिन अतीत का अनुभव चेतावनी भी देता है। अस्थायी युद्धविराम अक्सर भरोसे की बजाय अविश्वास को जन्म देते हैं। यदि यह समझौता टूटता है तो ठंड से जूझ रहे यूक्रेनी नागरिकों पर इसका मनोवैज्ञानिक आघात और गहरा होगा। इसलिए असली कसौटी शब्दों की नहीं जमीन पर दिखने वाली शांति की है।
बहरहाल, यदि ठंड के नाम पर थोड़ी भी राहत मिलती है तो यह मानवता की जीत होगी। पर यदि यह केवल रणनीतिक विराम निकला तो आने वाले दिन और भी कठोर हो सकते हैं। वैसे यूक्रेन की ठिठुरती रातें दुनिया से केवल सहानुभूति नहीं बल्कि ठोस और भरोसेमंद शांति की मांग कर रही हैं।