By अभिनय आकाश | Jul 20, 2026
रूस ने अपना सबसे खतरनाक AL51 F1 इंजन विकसित कर लिया है और इससे पहले कि इसकी टेस्टिंग की धूल ठंडी होती रूस ने भारत के दरवाजे पर एक ऐसा ऑफर रख दिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। यह सिर्फ एक सौदा नहीं है। यह भारत के लिए स्टेल्थ पावर बनने का सुनहरा टिकट है। AL51 को दुनिया मास्टर पीस कह रही है। दशकों से स्टेल फाइटर इंजन के मामले में अमेरिका का कोई मुकाबला नहीं था। लेकिन रूस के AL51 F1 ने उस वर्चस्व को हिला कर रख दिया। यह इंजन ना केवल फाइटर जेट को सुपर क्रूज यानी बिना आफ्टर बर्नर के सुपरसोनिक रफ्तार की ताकत देता है बल्कि इसका थ्रस्ट वेक्टरिंग और इसका कम हीट सिग्नेचर इसे रडार की नजरों से ओझल रखने में मदद करता है। रूस की टेस्टिंग अब अंतिम चरण में है और रिपोर्ट कहती है कि यह इंजन अमेरिका के सबसे एडवांस इंजनों को पानी पिलाने की ताकत रखता है।
भारत काफी समय से अमेरिकी F414 इंजन का इंतजार करता रहता है। लेकिन हाल ही में खबरें आई कि उन इंजनों की सप्लाई को लेकर अनिश्चितताएं बनी हुई है। कुछ रिपोर्ट तो यहां तक दावा कर रही हैं कि जो इंजन भारत को मिलने थे उन्हें किसी और ग्राहक को दिया जा सकता है। ऐसे में भारत के पास अपने एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एमका के लिए एक बहुत बड़ा शून्य पैदा हो गया था। पुतिन ने इसी मौके को भांप लिया। रूस जानता है कि इंजन ही वो कड़ी है जहां भारत को सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है और इसी दुबती रख पर मरहम लगाकर रूस ने भारत को अपना सबसे बड़ा रक्षा साझदार बनाए रखने का दांव खेल दिया है। लेकिन गौर करने वाली बात है कि इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में कुछ भी मुफ्त में नहीं मिलता। एक्सपर्टों का मानना है कि रूस के इस ऑफर के पीछे एक बड़ा मकसद है। रूस चाहता है कि भारत उसके सबसे आदमी स्टील फाइटर जेट एसयू 57 की खरीद पर फिर से विचार करें।
एसयू 57 को अब तक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर नहीं मिले हैं। अगर भारत जैसा बड़ा खरीदार इसमें दिलचस्पी दिखाता है तो रूस के रक्षा उद्योग को वो ऑक्सीजन मिलेगी जिसकी उसे पश्चिमी पाबंदियों के बीच सख्त जरूरत है। इसके अलावा AL51 के विकास पर रूस ने अरबों डॉलर खर्च किए हैं और भारत को इंजन बेचकर वह उस निवेश की भरपाई करना चाहता है। एक तरफ अमेरिका की आधुनिक लेकिन अनिश्चित तकनीक है और दूसरी तरफ रूस का वह भरोसा और तकनीक है जो भारत को आत्मनिर्भर बना सकती है। अगर यह समझौता भारत रूस के बीच हो जाता है तो भारत ना केवल उन्नत इंजन तकनीक तक पहुंचेगा बल्कि भविष्य के स्वदेशी स्टील फाइटर के निर्माण में दशकों की दूरी को कुछ ही सालों में तय कर लेगा।