By अभिनय आकाश | Jul 10, 2026
अरब देशों को यह ईरान की शुरू से चेतावनी रही है। ईरान अरब देशों को बताकर मारता है। वो कहता है कि हमें आपसे दिक्कत नहीं।हाल ही में ईरान ने कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और क़तर पर मिसाइलें और ड्रोन मारे हैं। कुवैत और बहरीन का तो फिर भी समझ में आता है कि यह देश इसराइल के खेमे में हैं और ईरान की तबाही चाहते हैं। लेकिन क़तर पर भी ईरान ने पलटवार किया है। जबकि क़तर और ईरान के संबंध इसीलिए अहम है क्योंकि पाकिस्तान के साथ क़तर भी ईरान अमेरिका पीस डील में मीडिएटरशिप कर रहा है। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट और गल्फ न्यूज़ के पूर्व एडिटर बॉबी नकवी कहते हैं कि क़तर की टॉलरेंस ज्यादा है। वो बर्दाश्त कर लेगा। वो कहते हैं कि दरअसल अरब देशों का अमेरिका पर कंट्रोल नहीं है। यह लोग अमेरिका के आगे इतने मजबूर हैं कि उन्हें मना नहीं कर सकते। जबकि क़तर खुद अमेरिका ईरान की बातचीत करवा रहा है। लेकिन अमेरिका अगर वहां से ईरान पर हमले अंजाम दे रहा है तो ईरान में आईआरजीसी की इंटेलिजेंस भी काफी तेज है। उन्हें पता होता है कि कहां से अटैक हुआ और जैसे ही पता चलता है वह जवाबी अटैक कर देते हैं। यही वजह रही कि कुवैत और बहरीन के साथ ही क़तर पर भी ईरान ने जवाबी हमला अंजाम दिया।
जब क़तर से भी हमले हो रहे हैं तो क़तर बातचीत में कैसे निष्पक्ष रह सकता है? यह एक बड़ा सवाल है। इधर ईरान के सुप्रीम लीडर रहे सैयद आयतुल्ला अली खामने का जनाजा नजफ से कर्बला होते हुए ईरान के मशहद पहुंच गया है और वहां सुपुर्द खाक किए जाने की तैयारी है। उधर अमेरिका की जुर्रतों पर ईरान के जवाब ने एक बार फिर सैन्य टकराव के हालात पैदा कर दिए हैं। पूरे मिडिल ईस्ट में हाई अलर्ट है। लगातार दूसरे दिन अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने पलटवार करते हुए कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर दिए। ईरान के इस्लामिक रेवोलशनरी गार्ड कॉप्स यानी पासदारा ने इस्लाम ने बयान जारी करके कहा है कि उसकी नौसेना और एयररोस्पेस फोर्स ने जॉइंट ऑपरेशन चलाकर कुवैत के अरिफजान और अली अल सलेम एयरबेस जबकि बहरीन के जुफैर और शेख ईसा के अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।