Health Tips: Quinoa और कटहल का आटा है 'Health' का खजाना, Diabetes-Liver की बीमारियों में रामबाण

By अनन्या मिश्रा | Mar 02, 2026

अच्छी सेहत के लिए सही खानपान और लाइफस्टाइल में सुधार सबसे जरूरी माना जाता है। क्योंकि जैसी लाइफस्टाइल है और जो भी हम खाते हैं, उसका हमारी सेहत पर सीधा असर होता है। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट सभी लोगों को अपनी लाइफस्टाइल ठीक रखने की सलाह देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक आजकल लोग मैदा, प्रोसेस्ड फूड, नमक और चीनी वाली चीजों का अधिक सेवन करते हैं। जिस कारण डायबिटीज, हाई बीपी, मोटापा और हृदय रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

सेहत के लिए कौन सा आटा अच्छा

भारत में गेहूं और इसका आटा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला अनाज है। इसमें फाइबर, आयरन, कार्बोहाइड्रेट और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। साबुत गेंहूं का आटा पाचन को बेहतर बनाता है और ऊर्जा देने में मदद करता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में अन्य तरह के आटे की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। जिसको अध्ययनों में कई प्रकार से लाभकारी पाया गया है।

आजकल पारंपरिक गेहूं के आटे के साथ हरे कटहल के आटे और क्विनोआ के आटे का भी लोग काफी इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह दोनों ऑप्शन पोषक तत्वों से भरपूर हैं। यह खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो ब्लड शुगर, पाचन या वजन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

सेहत के लिए लाभकारी क्विनोआ का आटा

क्विनोआ एक स्वास्थ्यवर्धन बीज है, जोकि कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इस कारण इसको सुपरफूड माना जाता है।

क्विनोआ में फाइबर, आयरन, अमीनो एसिड, मैग्नीशियम, मैंगनीज, प्रोटीन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, फोलेट और विटामिन-बी होता है।

क्विनोआ में मौजूद अमीनो एसिड मांसपेशियों की मरम्मत करता है और इसके विकास में अहम भूमिका निभाता है।

क्विनोआ में फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है, जोकि पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराता है। जिससे आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं।

जानिए ये फायदे

इसमें पोटैशियम और ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है। जोकि बीपी को कंट्रोल करने के साथ बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकता है।

क्विनोआ में मौजूद मैग्नीशियम, विटामिन बी, आयरन और फॉस्फोरस एनीमिया को रोकने में मदद करते हैं।

हालांकि क्विनोआ के अधिक सेवन से गैस, पेट दर्द, ब्लोटिंग या डायरिया हो सकती है। वहीं जिनको हाई बीपी, किडनी स्टोन या एलर्जी की समस्या है, उनको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

हरे कटहल का आटा

मधुमेह रोगियों में प्लाज्मा शर्करा के लेवल को कम करने और ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन को कंट्रोल करने में कटहल का आटा काफी कारगर माना गया है। बता दें कि ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन बढ़ना डायबिटीज का संकेत माना जाता है। साथ ही इसको फैटी लीवर और मोटापे को रोकने में भी कारगर बताया गया था।

लिवर और शुगर दोनों के लिए फायदेमंद

चूहों पर किए गए शोध में पता चलता है कि सिर्फ तीन महीने हरे कटहल के आटे के सेवन से न सिर्फ शरीर के वजन में वृद्धि को काफी हद तक रोका जा सकता है। बल्कि यह लिवर में फैट जमने समस्या को भी कम करने में कारगर है।

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