यूरोपीय मूल्यों से भारतीय विरासत तक, New Delhi में खुली Rabindranath Tagore की विचार यात्रा

By प्रेस विज्ञपति | May 31, 2026

रवीन्द्रनाथ ठाकुर समग्रता में विचार प्रस्तुत करते थे। वे जीवन को टुकड़ों में नहीं, बल्कि संपूर्णता में देखने के पक्षधर थे। यह कहना है युवा साहित्यकार डॉ. नवीन नीरज का। वे अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा शनिवार को प्रवासी भवन, नई दिल्ली में रवीन्द्रनाथ के निबन्ध पुस्तक पर आयोजित चर्चा में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। 

लेखिका प्रिया वरुण कुमार ने कहा कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर के निबंधों में प्रकृति, शिक्षा और समाज सुधार से संबंधित विचार मिलते हैं। वे मानवतावाद और विश्वबंधुत्व का संदेश देते हैं। 

पुस्तक-चर्चा का संचालन करते हुए शोधार्थी अजीत कुमार ने कहा कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की विचारधारा का मूल आधार उनका गहन धर्म-बोध था, जो उनके व्यक्तित्व और चिंतन से अभिन्न रूप से जुड़ा था। उनके पिता महर्षि देवेन्द्रनाथ ठाकुर की आध्यात्मिक साधना का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा, किंतु प्रकृति के प्रति उनकी असाधारण संवेदनशीलता ने भी उनके धर्म-बोध को समृद्ध किया। सूर्योदय, ऋतु-परिवर्तन, मेघ, वर्षा और नदी की धारा उनके अंतर्मन को आनंद और रहस्य से भर देते थे।

इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के केंद्रीय कार्यालय सचिव संजीव सिन्हा, पवन कुमार अरविंद, विकास आनंद एवं अनुराग द्विवेदी ने सहभागिता की।

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