Chai Par Sameeksha: राहुल गांधी जाति जनगणना कराना चाहते हैं मगर अपनी जाति क्यों नहीं बताना चाहते?

By अंकित सिंह | Aug 05, 2024

प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने राहुल गांधी और दिल्ली कोचिंग सेंटर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी। नीरज दुबे से हमने राहुल गांधी के जातिगत जनगणना वाले दांव के बारे में ही सवाल पूछा। नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी एक ओर जहां न्याय यात्रा निकालते हैं तो वहीं दूसरी ओर वह लोगों को जाति में बांटने की बात कर रहे हैं। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि जाति आधारित जनगणना की मांग करने वाले राहुल गांधी को यह बताना चाहिए कि बिना जाति बताएं यह कैसे संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि राहुल जातिगत जनगणना की मांग तो कर रहे हैं लेकिन अपनी जाति नहीं बताना चाहते। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस की मंशा क्या है, इस पर सवाल बरकरार है। राहुल गांधी के इस चाल में कई विरोधाभास नजर आ रहे हैं। ऐसे में कहीं ना कहीं इसके सियासी संकट ही निकाल कर सामने आ रहे हैं। 

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बजट को लेकर संसद में हुए भाषण पर नीरज दुबे ने कहा कि देश के ज्वलंत समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं है। संसद में नेताओं के भाषण को सुनने पर ऐसा लग रहा है कि नेता बस इसलिए भाषण देना चाहते हैं ताकि उनका स्पीच वायरल हो जाए। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, दोनों ओर के नेताओं का असली मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं लगता है। असली मुद्दों को संसद में नहीं उठाए जा रहे हैं। जनता के मुद्दे संसद से दूर होते जा रहे हैं। देश की समस्याओं पर जोर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 10 दिन से ज्यादा सांसद के कार्रवाई हो गई है। लेकिन लोगों के लिए सांसदों ने कितने सवाल पूछे, छात्र, किसान, युवा, बेरोजगारी, महंगाई और महिलाओं को लेकर नेताओं ने संसद में कितने सवाल पूछे हैं। इस पर उनके जवाब सामने आने चाहिए। क्या उनके द्वारा पूछे गए सवालों का समाधान हो गया है तो इसका जवाब मिलेगा नहीं। आजकल देश की अदालते हीं समस्याओं का समाधान निकलती नजर आ रही है। 

दिल्ली के कोचिंग सेंटर में पानी में डूबने से तीन छात्रों की हुई। मौत को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि कहीं ना कहीं यह बेसमेंट में नहीं, हमारी प्रतिष्ठा में पानी घुसा है। हम विकसित भारत की कल्पना कर रहे हैं लेकिन हमारे देश की राजधानी जो है वहां व्यवस्थाओं को सुदृढ़ नहीं कर पा रहे हैं। नियमों को ताख पर रखा जा रहा है। दिल्ली सरकार भी दिल्ली मॉडल का खूब प्रचार कर रही है। लेकिन यहां समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। दिल्ली मॉडल यही है कि यहां कोचिंग सेंटर में बच्चे डूबने से मर जाते हैं। दिल्ली मॉडल यही है कि यहां राहत केंद्र में एक महीने में 13 से 14 बच्चों की मौत हो जाती है। शिक्षा की व्यवस्था खराब है। अस्पतालों में व्यवस्था खराब है। आरोप-प्रत्यारोप भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच चलता रहेगा। लेकिन कहीं ना कहीं दिल्ली की जो चुनी हुई सरकार है, उसको जनता के लिए कामकाज करने होंगे। नीरज दुबे ने कहा कि पहले भी कई ऐसे मौके आए हैं जब दिल्ली में किसी और पार्टी के सरकार रही है और केंद्र में किसी और पार्टी की। लेकिन दिल्ली और केंद्र सरकार ने मिलकर काम किया है।

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