राहुल अच्छे नेता, चुनाव परिणाम के बाद PM के नाम पर बनेगी सहमति: चंद्रबाबू नायड्र

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 14, 2019

हल्दिया (पश्चिम बंगाल)। तेलुगू देशम प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने राहुल गांधी को ‘‘देश के लिए सोचने वाला अच्छा नेता’’ बताते हुये कहा है कि 1996 के विपरीत, गैर भाजपा दल, यह गलती नहीं दोहरायेंगे कि अगर केंद्र में सरकार बनाने के लिए कोई गठबंधन होता है तो उससे कांग्रेस को बाहर रखा जाए। पूर्व मिदनापुर के हल्दिया में आयोजित एक चुनावी रैली से इतर नायडू ने पीटीआई-भाषा को दिए साक्षात्कार में दावा किया कि भाजपा बाहर होने जा रही है और एक गठबंधन सरकार बनाने की कोशिश में है। उन्होंने कहा कि बेहतर यही होगा कि संतुलन कायम रखा जाए। वह यहां तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी के प्रचार के लिए यहां आये थे। गैर-भाजपा मोर्चे के प्रधानमंत्री प्रत्याशी जैसे विवादास्पद मुद्दे के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि मोर्चे में शामिल दल,‘‘परस्पर सहमति पर पहुंच जायेंगे, जब एक बार यह स्पष्ट हो जाए कि किस दल को कितनी सीटें मिली हैं।’’ उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हताश हो गए हैं क्योंकि उन्हें महसूस हो गया है कि वह लोकसभा चुनाव में पराजित हो रहे हैं।

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री ने आरोप लगाते हुये कहा, ‘‘सत्ता विरोधी बयार है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी तरह से पूरी कोशिश की लेकिन उनके पास कोई उपलब्धि नहीं है। इस वजह से उन्होंने पुलवामा (आतंकी हमले) और हवाई हमलों (बालाकोट) की बात करनी शुरू कर दी है। हर सभा में वे विपक्षी नेताओं को दोषी ठहराते हैं और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप मोदी का चुनावी अभियान देखें तो आप पायेंगे कि वह कमजोर और अधिक हताश होते जा रहे हैं। इससे पहले भी वे कमजोर थे लेकिन उन्होंने मीडिया को अपने पक्ष में कर रखा था। उन्होंने सभी राजनीतिज्ञों को धमकाया इसलिए कोई अपनी आवाज नहीं उठाता है।’’ उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर कहा, ‘‘वह (राहुल गांधी) अच्छे नेता हैं। वह देश के लिए चिंतित हैं, नरेंद्र मोदी की तरह नहीं, जो खोखले हैं और किसी की नहीं सुनते। मोदी ने दूसरों को धमकियों देकर शासन चलाया है।’’ 

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उन्होंने कहा, ‘‘1996 में, एक प्रयोग किया गया और वह नाकाम रहा। हमने कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखा और उन्होंने समर्थन वापस ले लिया। इसलिए एक स्थिर सरकार के लिए, हमें एक साथ आना होगा।’’ कांग्रेस ने 1996 में संयुक्त मोर्चा सरकार को समर्थन दिया था पर बाद में समर्थन वापस ले लिया जिससे यह सरकार गिर गई थी। प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के लिए सुझाव मांगे जाने पर उन्होंने नकारते हुये कहा,‘‘यह आंकड़ों का खेल है और लोकतंत्र का अर्थ संख्या से है और सबको साथ आना होगा।’’ उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री के रूप में पेश किए जाने संबंधी प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘मेरा राज्य छोटा है। मेरे अंक महज 25 (आंधप्रदेश की लोकसभा में सीटें) हैं। यह संख्या बहुत कम है।’’ 

 

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