राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: बैलों से खेती करने वाले किसानों को हर साल मिलेंगे 30 हजार

By रेनू तिवारी | Nov 22, 2025

राजस्थान सरकार बैलों की मदद से खेती करने वाले चयनित किसानों को हर साल 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देगी। इसके लिए अब तक42 हजार से अधिक आवेदन मिले हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक एवं जैविक खेती पद्धति और गौवंश संरक्षण को बढ़ावा देना और किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करना है।

इसे भी पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी ने जोहानिसबर्ग में भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की

किन किसानों को सालाना 30,000 रुपये मिलेंगे?

राजस्थान सरकार किसानों को प्रोत्साहन राशि के तौर पर सालाना 30,000 रुपये देगी। सरकार यह रकम ऐसे किसानों को देगी जो बैलों की मदद से खेती करेंगे। राजस्थान सरकार ने बैलों की संख्या में तेजी से कमी आने की वजह से यह बड़ा कदम उठाया है। सरकार के इस कदम से बैल पालने वालों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इसके अलावा, बैलों की एक जोड़ी के मालिकों को सालाना 30,000 रुपये दिए जाएंगे।

किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?

राजस्थान में कुछ ही किसान इस सरकारी स्कीम का फायदा उठा पाएंगे। स्कीम का फायदा उठाने के लिए किसानों को अपने नजदीकी ई-मित्र पर जाना होगा। फिर वे राज किसान साथी पोर्टल के जरिए भी अप्लाई कर सकते हैं। अप्लाई करने के बाद कियोस्क ऑपरेटर से एप्लीकेशन ली जाएगी।

इसे भी पढ़ें: मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी

इस स्कीम से सालाना यह रकम मिलती है

जानकारी के लिए बता दें कि PM किसान सम्मान निधि योजना के तहत सरकार हर साल 6,000 रुपये देती है। यह रकम 2,000 रुपये की तीन किस्तों में दी जाती है। हर किस्त का गैप 4 महीने का होता है। इस स्कीम के तहत अब तक 2,000 रुपये की 19 किस्तें जारी की जा चुकी हैं, जिनका अगली किस्त का बेसब्री से इंतज़ार है। 

प्रमुख खबरें

हम Kerala की A-Team हैं, Shashi Tharoor का बड़ा दावा- Congress जीतेगी 100 सीटें

CAG Report से Kejriwal के शीश महल का सच आया सामने, BJP बोली- Delhi की जनता का पैसा लुटाया, जारी किया Video

IPL 2026 की ओपनिंग सेरेमनी का नहीं होगा आयोजन, BCCI ने इस कारण लिया बड़ा फैसला

Rajya Sabha में फिर भड़कीं SP MP Jaya Bachchan, टोका-टोकी पर बोलीं- बच्चे बैठ जाओ